Hazaribagh : हजारीबाग के सारले मौजा की करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन से जुड़े कथित रिकॉर्ड हेराफेरी मामले में निचली अदालत ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश ऐसे समय आया है, जब शिकायतकर्ता करीब छह वर्षों से इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। अदालत के आदेश के बाद शिकायतकर्ता राजेश मिश्रा ने अपनी खुशी इजहार करते हुये कहा कि अब उन्हें उम्मीद है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी।
21 एकड़ जमीन और रिकॉर्ड में कथित खेल
यह मामला सारले मौजा के खाता संख्या-93 और 118 से जुड़ा है। इल्जाम है कि लगभग 21 एकड़ जमीन के बंदोबस्ती रिकॉर्ड में सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ की गई। इनमें करीब 9 एकड़ सरकारी भूमि और 12 एकड़ रैयती जमीन शामिल है। राजेश मिश्रा का दावा है कि रिकॉर्ड रूम में रखे मूल सरकारी दस्तावेजों में बदलाव कर जमीन के स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड प्रभावित किये गये। शिकायतकर्ता ने मीडिया को बताया कि वर्ष 2016 में तत्कालीन उपायुक्त रविशंकर शुक्ला को आवेदन देकर मामले की शिकायत की थी। उपायुक्त ने अपर समाहर्ता और SDO को जांच तथा फॉरेंसिक परीक्षण के निर्देश भी दिये थे, लेकिन उनके तबादले के बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका।
हार नहीं मानी, हाईकोर्ट पहुंचे
मामला ठंडा पड़ने के बावजूद शिकायतकर्ता पीछे नहीं हटे। उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि निजी स्तर पर कराई गई फॉरेंसिक जांच में दस्तावेजों से कथित छेड़छाड़, हस्ताक्षरों में बदलाव और रिकॉर्ड में फेरबदल के संकेत मिले हैं। हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता को निचली अदालत जाने का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्होंने वहां FIR दर्ज कराने की मांग की। निचली अदालत ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी, लेकिन आरोप है कि करीब एक वर्ष तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। इसके बाद अदालत ने FIR दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया।
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