Kohramlive : फिलिस्तीनी चरमपंथी समूह हमास एक सशस्त्र शाखा है जिसे इज़ अल-दीन अल-कसम ब्रिगेड कहा जाता है। हमास, या इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन की स्थापना फिलिस्तीन इंतिफादा विद्रोह के दौरान 1987 में की गई थी। इसे ईरान का समर्थन मिला था। हमास की स्थापना शेख अहमद यासीन ने की थी। 12 साल की उम्र से वह व्हीलचेयर पर थे। साल 1987 में उन्होंने इस्राइल के खिलाफ पहले इंतिफादा की घोषणा की थी। इंतिफादा आमतौर पर “बगावत” या “विद्रोह” को कहा जाता है। 1988 में हमास ने कहा था कि इसकी स्थापना फिलिस्तीन की मुक्ति के लिए हुई है। हमास के सशस्त्र विभाग का गठन 1992 में हुआ। साल 1993 से लेकर साल 2005 तक हमास ने इस्राइल में कई आत्मघाती हमले किये।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हमास का 2007 से फिलिस्तीन के गाजा पट्टी पर शासन है। उस समय हमास ने वेस्ट बैंक में सत्ता पर काबिज और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के प्रमुख राष्ट्रपति महमूद अब्बास के लड़ाकों को एक गृह युद्ध में मात दे दी थी। 2006 में फिलिस्तीनी संसदीय चुनावों में जीत के बाद गाजा इलाके पर हमास का कब्जा हो गया। दूसरी ओर, अब्बास ने गाजा पर हमास के कब्जा करने को तख्तापलट बताया था।
हमास ने किया था इस्राइल के विनाश का ऐलान
1988 में हमास के संस्थापक चार्टर में इस्राइल के विनाश का ऐलान किया गया था। इसके लड़ाके इस्राइल को मिटाने की कसम खाते हैं। हमास को इस्राइल के अलावे संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ, कनाडा, मिस्र और जापान जैसे देश एक आतंकवादी संगठन मानते हैं। दूसरी ओर चीन, मिस्र, ब्राजील, ईरान, रूस, सीरिया, नॉर्वे, कतर और तुर्की इसे आतंकी संगठन नहीं मानते हैं। हमास का आधार और ताकत गाजा क्षेत्र में है, पर फिलिस्तीनी अधिपत्य वाले क्षेत्रों में भी इसके समर्थक हैं। इसके नेता कई देशों में फैले हुये हैं।
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