कोहराम लाइव डेस्क: हम जी रहे हैं साइंस और टेक्नोलॉजी के नए जमाने में। बात न्यू इंडिया की करते हैं। पूरी दुनिया के पल-पल के इंफॉरमेशन से अवगत होते रहते हैं। ऐसे में भारत में ही ऐसी कोई जगह है, जहां किसी को जाने से मना किया जाता है, तो इस पर यकीन करना कठिन हो जाता है। कोई भी यकीन नहीं कर सकता कि 21वीं सदी (21 st centuary) में भी भारत में एक ऐसी जगह है, जहां जाने के बाद आज तक कोई वापस नहीं लौटा, पर यह बात सही है।जी हां, हम बात कर रहे हैं Indian ocean के नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड की।
यह हैरत की अजीब बात है कि यहां इंसानों की एक प्रजाति के लोग रहते हैं, जिनका आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और सभ्यता से कोई वास्ता नहीं है। कोई इनके पास जाएं, यहां तो वे बर्दाश्त नहीं करते। इसलिए वहां जाने के बाद कोई वापस लौटकर नहीं आता।
इसे भी पढ़ें :पुलिस वालों को गच्चा देकर भागा कैदी, 12 घंटे बाद दबोचा गया

सेंटिनलीज जनजाति का आधुनिक मानव सभ्यता से कोई लेना–देना नहीं
दरअसल यहां रहने वाली जनजाति सेंटिनलीज जनजाति का आधुनिक मानव सभ्यता से कोई लेना-देना नहीं है। इन लोगों को कई बार आधुनिक समाज से जोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन इस जनजाति के लोग इतने ज्यादा आक्रामक हैं कि वे किसी को अपने पास आने ही नहीं देते। जो भी उनके पास जाता है, वह उसे खत्म कर देते हैं।
तीर-कमान और भाले के साथ रहते हैं खड़े
कई बार भारत सरकार समेत आम लोगों ने उन तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन इन लोगों ने उन्हें मार डाला। कुछ समय पहले गलती से एक भागा हुआ कैदी इस आइलैंड पर पहुंच गया था, तो इन आदिवासियों ने उसे भी मार दिया था।
साल 1981 में एक भटकी हुई नौका इस आइलैंड के आस-पास पहुंच गई थी। इस नौका में बैठे लोगों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई थी।
नौका के साथ वापस आए लोगों ने बताया था कि कुछ लोग किनारों पर तीर-कमान और भाले लेकर खड़े थे। किसी तरह वह लोग वहां से बचकर निकलने में सफल हो पाए थे।
इसे भी पढ़ें :AJSU नेता का शव जंगल में मिला, सिर पर चोट के निशान
भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर पर किया था हमला
बता दें कि साल 2004 में इस इलाके में भयानक भूकंप आया था। इस भूकंप के बाद भारत सरकार ने आइलैंड की खबर लेने के लिए सेना का हेलिकॉप्टर भेजा था, लेकिन उन लोगों ने सेना के हेलिकॉप्टर पर भी हमला कर दिया था।
न मोबाइल फोन, न ही बिजली
इस इलाके की हवाई तस्वीरों से साफ होता है कि यहां के लोग खेती नहीं करते, क्योंकि पूरे इलाके में घने जंगल हैं। यह जनजाति आज भी शिकार पर निर्भर है। करीब 60 हजार साल से ये लोग यहां रह रहे हैं। इन लोगों का आज भी किसी से कोई संबंध नहीं है। यहां से जो भी प्लेन गुजरता है, उन पर ये लोग तीरों में आग लगाकर मार देते हैं। हम आज बिना बिजली के रहने की कल्पना नहीं कर सकते, लेकिन यहां ना तो बिजली है और ना ही मोबाइल फोन।
इसे भी पढ़ें :मिलने के बहाने बुलाकर प्रेमी ने प्रेमिका के साथ कर डाला…






