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    इंडिया के उद्योग जगत के दो दिग्‍गजों का आज है बर्थ डे

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    • 28 दिसंबर को ही हुआ था धीरूभाई अंबानी और रतन टाटा का जन्‍म
    • जानें देश के विकास में उनका कंट्रीब्‍यूशन

    कोहराम लाइव डेस्क : इंडिया के उद्योग जगत की नामी-गिरामी हस्तियों के जन्‍म के नजरिये से 28 दिसंबर का खास महत्‍व है। इसी दिन धीरूभाई अंबानी और रतन टाटा का जन्‍म हुआ था। धीरूभाई का जन्‍म 1932 में हुआ था। इंडिया के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाले धीरूभाई का निधन 70 साल की उम्र में 2002 में हो गया था। रतन टाटा का जन्‍म 1937 में हुआ था। आज वह 83 साल के हो चुके हैं। उनकी सोच की कंस्‍ट्रक्टिव और क्रिएटिव एनर्जी आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरित करती है। तो चलिए, आज इंडिया के विकास में इन दोनों दिग्‍गजों के कंट्रीब्‍यूशन यानी योगदान पर एक नजर डालते हैं।

    धीरूभाई अंबानी

    यह सच है कि गुजरात के जूनागढ़ जिले के चोरवाड़ गांव में जन्मे धीरूभाई को आर्थिक तंगी क कारण हाईस्कूल की पढ़ाई छोड़कर छोटा-मोटा काम करना पड़ा था। उनके पिता हीराचंद गोवरधनदास अंबानी एक स्कूल में शिक्षक थे।
    धीरूभाई की आंखों में बचपन से ही कुछ नया करने का सपना था। उन्‍होंने कभी हार न मानने वाली अपनी हिम्‍मत, हिकमत और मेहनत के दम पर इसे साकार कर दिखाया। आज पूरी दुनिया में यह स्‍वीकार किया जाता है कि हमेशा लीक से हटकर सोचने के कारण धीरूभाई अंबानी ने बिजनेस करने के तौर-तरीकों को अपनी नई सोच से नया अंदाज दिया। अपनी बेमिसाल बिजनेस स्‍ट्रैटजी की बदौलत वह चंद दशकों में ही देश के सबसे रईस लोगों में शुमार हो गए।

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    1960 में डाली रिलायंस की नींव

    उल्‍लेखनीय है कि यमन के अदन शहर में धीरूभाई ने 300 रुपये महीने पर A.Besse and Co. में गैस स्‍टेशन पर अटेंडेंट का भी काम भी किया था। 1958 में 500 रुपये की पूंजी के साथ वह यमन से लौटे। अपने चाचा चंपकलाल दमानी के साथ एक टेक्‍सटाइल ट्रेडिंग कंपनी शुरू की। फिर 1960 में रिलायंस की नींव डाली।

    देश की सबसे बड़ी कंपनी

    रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड आज देश की सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है। इसका मार्केट कैप यानी बाजार पूंजीकरण इस समय 581,732.30 करोड़ रुपये है। इस मामले में यह देश की सबसे बड़ी कंपनी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज हाइड्रोकार्बन एक्‍सप्‍लोरेशन एंड प्रोडक्‍शन, पेट्रोलियम रीफाइनिंग एंड मार्केटिंग, पेट्रोकेमिकल्‍स, रिटेल और हाई-स्‍पीड डिजिटल सर्विस बिजनेस की सबसे बड़ी प्‍लेयर बन चुकी है।

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    रतन टाटा

    इंडिया के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपतियों में शुमार रतन टाटा आज 83 वसंत देख चुके हैं। उनका नाम एक दिग्‍गज बिजनेस मैन के रूप में ही नहीं जाना जाता है। सामाजिक दृष्टि से वह एक बड़े दानी के रूप में भी विख्‍यात हैं। देश-दुनिया के करोड़ों युवाओं के लिए वह प्रेरणादायक भी हैं और मार्गदर्शक भी। रतन टाटा इस उम्र में भी काफी एक्टिव हैं।

    यह ठीक है कि Tata Group को कामयाबी के माउंट एवरेस्‍ट तक पहुंचाने के बाद रिटायर हो चुके हैं, लेकिन आज भी टाटा ग्रुप उनके नाम के बिना अपूर्ण है। भारत सरकार ने उनकी उपलब्धियों को देखते हुए 2008 में उन्हें दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण और 2000 में पद्मभूषण से सम्मानित किया था। आज दुनिया में जहां भी टाटा ग्रुप का नाम लिया जाता है, उसके पोस्टर बॉय रतन टाटा ही रहते हैं।

    रतन टाटा का जन्‍म 28 दिसंबर 1937 को गुजरात के सूरत में पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम नवल टाटा और माता का नाम सोनू टाटा था। रतन टाटा का बचपन अच्छा नहीं गुजरा क्योंकि उनके माता-पिता उनके बचपन में ही अलग हो गए थे।

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    1981 में बने टाटा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष

    मुंबई में पढ़ाई पूरी करने के बाद रतन टाटा ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर बीएस और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम किया। इसके बाद 1962 में टाटा ग्रुप से जुड़े। अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर रतन टाटा 1981 में टाटा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष बने। रतन टाटा साल 1991 में जेआरडी टाटा के बाद टाटा ग्रुप के पांचवें चेयरमैन बने थे।

    टाटा ग्रुप को नई ऊंचाई पर पहुंचाया

    रतन टाटा ने मेहनत और नेतृत्व के दम पर टाटा ग्रुप को बदलकर रख दिया. उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिसने टाटा ग्रुप को दुनिया की बड़ी कंपनियों में शुमार कर दिया। रतन टाटा की अगुवाई में 1998 में टाटा मोटर्स ने टाटा इंडिका उतारी थी, जिसने कार मार्केट में तहलका मचा दिया और टाटा की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार बनी।

    TCS की लिस्टिंग

    रतन टाटा के कार्यकाल के दौरान ही साल 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को शेयर बाजारों में लिस्ट किया गया था। इसके 8 साल बाद 2012 में जब वो 75 साल के थे उन्होंने टाटा ग्रुप का चेयरमैन पद छोड़ दिया, उन्होंने ये जिम्मेदारी सायरस मिस्त्री को सौंप दी।  स्टार्टअप्स पर भरोसा रतन टाटा ने कई स्टार्टअप में भी निवेश किया है, रतन टाटा ओला, पेटीएम, कार देखो, क्योरफिट, स्नैपडील, आबरा, क्लिमासेल, फर्स्ट क्राई, अर्बन लैडर और लेंसकार्ट जैसी कई कंपनियों में निवेश कर चुके हैं।

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