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चाहत परवान चढ़े तो आसान हो जाता है कामयाबी का सफर

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  • साफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर IAS बनीं सौम्या
  • वर्तमान में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की है मैनेजिंग डायरेक्टर

कोहराम लाइव डेस्क: कहा जाता है, चलती का नाम जिंदगी। और दूसरी ओर चाहत के परवान चढ़ने का नाम है कामयाबी यानी सक्सेस(Success)। संजीदा और गहरे एहसास से जुड़ी जिंदगी परिवर्तन के हर मोड़ के साथ कामयाबी की नयी लकीर खींचने का हुनर रखती है। ऐसी मिसालें कम मिलती है, पर होती है बड़ी प्रेरक। जी  हां, हम बात कर रहे हैं सौम्या अग्रवाल की, जिन्होंने साफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर आईएएस बनने की ठानी और साबित कर दिया कि मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए। आज वह डीवीवीएनएल की मैनेजिंग डायरेक्टर है।

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एसडीएम, डीएम से लेकर एमडी तक की यात्रा

सौम्या अग्रवाल ने बताया, मैंने पिताजी के भरोसे को फतह किया और दादाजी की ख्वाहिश पूरी कर दी। नौकरी को अलविदा कहने के दो वर्ष बाद नई पारी की शुरुआत हुई और मैं करियर में एसडीएम, सीडीओ, डीएम से लेकर एमडी तक की ऊंचाई पर सुखद अहसास के साथ चढ़ गई।

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लखनऊ में प्राथमिक शिक्षा

सौम्या की प्राथमिक शिक्षा नवाबों के शहर लखनऊ में पूरी हुई। पिता ज्ञानचंद अग्रवाल रेलवे में सिविल इंजीनियर थे। उनका परिवार आलमबाग की रेलवे कालोनी में रहता है। वह हमेशा साइकिल से स्कूल जाती थीं।

कंपनी ने भेज दिया लंदन

सेंट मैरी कांवेंट स्कूल से इंटरमीडिएट पास करने वाली अग्रवाल परिवार की बेटी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया, लेकिन दिल्ली पहुंचने तक भी पढ़ाई की अहमियत को गंभीरता से नहीं समझा। दोस्तों के साथ रहते-रहते दिल्ली में ही साफ्टवेयर इंजीनियर बन गईंं और वर्ष 2004 में पुणे की एक निजी कंपनी में नौकरी मिल गई। फिर कंपनी ने ही लंदन भेज दिया। पढ़ाई पूरी हुई और नौकरी मिली जरूर, पर सौम्या के मन को संतुष्टि नहीं मिली।

लंदन में याद आता रहा वतन

सौम्या को लंदन में हमेशा अपने देश की याद सताती रही और देश की वह अवाम याद आती रही, जिसके लिए वह कुछ करना चाहती थीं। इसके अलावा मां-बाप से इतना दूर चला जाना भी उन्हें स्वीकार नहीं था। सौम्या ने उसी वक्त ठान ली कि आइएएस बनना है।

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वर्ष 2006 में लौट आईं हिन्दुस्तान

उन्होंने पिता को आश्वास्त किया और वर्ष 2006 में नौकरी छोड़ हिन्दुस्तान लौट आईं। लखनऊ में ही सौम्या ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि तीन माह दिल्ली के बाजीराव संस्थान में जरूर कोचिंग की थी। उन्होंने एक वर्ष की कड़ी मेहनत से पहली बार में ही यूूपीएससी का इम्तिहान को समेट कर रख दिया।

आईएएस बनने के बाद 2008 में संभाला एसडीएम का पद

परीक्षा के परिणाम की सूची में 24वें नंबर पर उनका नाम था और वर्ष 2008 में नवनियुक्त आइएएस सौम्या अग्रवाल ने कानपुर मेंं एसडीएम का कार्यभार संभाल लिया।

एमडी तक का सफर

सौम्या की नौकरी की शुरुआत कानपुर से हुई। सर्वप्रथम वह कानपुर में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) के पद पर तैनात हुईं। महाराजगंज में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और जिलाधिकारी (डीएम) रहीं। फिर उन्नाव में डीएम रहीं। फिर से उनकी तैनाती कानपुर में केस्को में बतौर एमडी हो गईंं और अब वह डीवीवीएनएल की प्रबंध निदेशक (एमडी) हैं।

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