spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

मेहनत की बदौलत लिखी Success की नई इबारत

Date:

spot_img
spot_img
  • यूपी के बस्‍ती जिले के एक दंपती ने किया कमाल, मेहनत और स्किल ने दिलाई कामयाबी
  • गांव की रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री से अमेरिका और अफ्रीका में होने लगा एक्‍सपोर्ट
  • अब तक करीब तीन करोड़ रुपये के निर्यात के ऑर्डर मिल चुके हैं

कोहराम लाइव डेस्क : डिजिटल इंडिया ने देश के युवकों को नया विजन दिया है। मेहनत की बदौलत वे कामयाबी की नई-नई इबारत लिख रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफार्म ने गांव के होनहार युवाओं को भी वैश्विक फलक पर ला दिया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं यूपी के बस्‍ती जिले के एक दंपत्‍ती की। तकनीक का उपयोग कर मेहनत से इस युवा दंपती ने गांव में ही रेडीमेड गारमेंट्स की फैक्ट्री लगाई। यहां के मेहनत से तैयार होने वाले कपड़ों की मांग अमेरिका और अफ्रीका तक है। अब तक करीब तीन करोड़ के निर्यात के ऑर्डर मिल चुके हैं।

इसे भी पढ़ें : यहां Jail में अपने परिवार के साथ भी रहते हैं कैदी

तमिलनाडु में काम करते थे नरसिंह

बस्ती जिले की भानपुर तहसील के परसा लगड़ा गांव के नरसिंह चौधरी ने इंटर की पढ़ाई करने के बाद रोजगार की तलाश में घर छोड़ दिया। नरसिंह तीन साल पहले तक तमिलनाडु में रेडीमेड गारमेंट्स बनाने वाली मल्टीनेशनल कंपनी में एक्सपोर्ट का काम देखते थे। वहां अच्छी कमाई हो जाती थी।

पत्‍नी रेणु ने किया प्रेरित

शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ीं तो पत्नी रेणु चौधरी की प्रेरणा से गांव में रेडीमेड गारमेंट्स की फैक्ट्री लगाने का निर्णय लिया। 2017 में एक एकड़ जमीन पर फैक्ट्री लगाने के लिए स्टैंडअप योजना से 70 लाख रुपये का लोन लिया। इसके बाद 40 अत्याधुनिक जापानी मशीन खरीदी। रेडीमेड गारमेंट बनाने के लिए पेस्टिंग मशीन से लेकर ड्रायर तक खरीदा। फैक्ट्री में शूटिंग-शर्टिंग के साथ बच्चों और महिलाओं के कपड़ों की लंबी रेंज तैयार होने लगी।

इसे भी पढ़ें : व्हेल की उल्टी ने पलटी किस्मत, गरीब मछुआरा बना करोड़पति

अमेरिका से 1000 डॉलर का भुगतान मिला

वेबसाइट पर प्रोडक्ट के ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण से बीते वर्ष अमेरिका और अफ्रीका से कॉटन शर्ट और लोवर के ऑर्डर मिले। नरसिंह बताते हैं कि अमेरिका को सैंपल भेजा गया। उसके एवज में 1000 डालर का भुगतान मिला। साथ ही 2.25 करोड़ रुपये के कपड़ों का ऑर्डर भी फाइनल हो गया। अब उस ऑर्डर को पूरा करने में जी जान से जुटे हैं। इसके अलावा कई अफ्रीकी देशों से भी ऑर्डर मिले।

29 लाख की बची है देनदारी

फैक्ट्री की साझेदार रेणु चौधरी बताती हैं कि स्थानीय मार्केट की मांग को देखते हुए कपड़े तैयार हो रहे हैं। तीन साल में 70 लाख के लोन में से सिर्फ 29 लाख रुपये की देनदारी बची है। विदेशों को एक्सपोर्ट से वित्तीय वर्ष के अंत तक लोन की रकम खत्म होने की उम्मीद है।

इसे भी पढ़ें : मनुष्‍य जोर लगा दे तो Stone बन सकता है Water

इसे भी पढ़ें :

मेहनत के बाद भी नहीं मिल रही कामयाबी, ये आसान तरीका अपनायें…

Kohramlive : जीवन में सफलता पाने के लिये हर...

500 में 500 अंक, रांची की बेटी बनीं राष्ट्रीय टॉपर…

Ranchi : रांची की होनहार बेटी अवनी केजरीवाल ने CBSC...

इन तीन बातों को हमेशा रखें गुप्त, वर्ना तबाह हो जायेगी जिंदगी…

Kohramlive : आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र ( Chanakya...

रिक्शा चालक दिलखुश ने बनाया कैब सर्विस ऐप, 50 प्रतिशत सस्ता किराये का दावा

Kohramlive : बिहार का रिक्शावाला भी कमाल कर सकता...
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

मेहनत के बाद भी नहीं मिल रही कामयाबी, ये आसान तरीका अपनायें…

Kohramlive : जीवन में सफलता पाने के लिये हर...

500 में 500 अंक, रांची की बेटी बनीं राष्ट्रीय टॉपर…

Ranchi : रांची की होनहार बेटी अवनी केजरीवाल ने CBSC...

इन तीन बातों को हमेशा रखें गुप्त, वर्ना तबाह हो जायेगी जिंदगी…

Kohramlive : आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र ( Chanakya...

रिक्शा चालक दिलखुश ने बनाया कैब सर्विस ऐप, 50 प्रतिशत सस्ता किराये का दावा

Kohramlive : बिहार का रिक्शावाला भी कमाल कर सकता...