रांची : जितना के बाबू नहीं, उतना के झुनझुना। खाने पीने को पैसा नहीं, फाइन कहां से भरेंगे। एक बार तो बप्पा कहीं से मांगकर 10 हजार रुपये लाकर दिया। टेम्पो छुड़ा थाने से लाये। दो दिन बाद फिर धरा गये। बाप पूछा, बार बार तोरे काहे धर लेता है, कागज पत्तर ठीक ठाक काहे नहीं रख चलते, अब कौन समझाये बाप को कि, परमिट बने तब ना? छोड़ दिये हैं थाना में ही सड़ने। जब पैसा होगा तब सोचेंगे। यह कहना है, टेम्पो चालक उदय का। उसने कहा 3 दिन पहले थाना गये थे, अपना टेम्पो देखने? पूरा नक्शा बिगड़ गया है टेम्पो का। अब छुड़ाने से कोई फायदा नहीं। का बोले, जितना के बाबू नहीं, उतना के झुनझुना, वाली बात हो जायेगी। जितना जुर्माना ठोंका है, उतना बैंक में डाउन पेमेंट कर एगो छोटा कार निकाल, ओला या उबर में चलाने का मूड बना लिये हैं। एक बैंक मैनेजर से बातें ही गई है। यह कहानी केवल एक उदय की नहीं, इसके जैसे हजारों उदय है। यह टेम्पो चला अपना और परिवार का पेट पालते थे।
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9 टेम्पो चालक सलाखों के पीछे
चौंकाने वाली बात यह है कि 9 वैसे टेम्पो चालक हैं, जो अभी सलाखों के पीछे हैं। टेम्पो का स्टेयरिंग थामने वाले हाथों ने चक्कू छुडिया और सिंगल शॉट थाम अपराध जगत से नाता जोड़ लिया। अरगोड़ा, कोतवाली, जगरनाथपुर और डोरंडा थाना पुलिस फाइल में ऐसे ही कुछ टेम्पो चालकों के कारनामे की गाथा दर्ज है। 3 ट्रैफिक थानों में 5 हजार से ज्यादा टेम्पो जब्त है। सबसे हैरत कि बात यह है कि सिर्फ इस साल कितने टेम्पो जब्त किये गये, यह सूची तक ट्रैफिक पुलिस के पास नहीं। मांगने पर सिर्फ टालमटोल।
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