कोहराम लाइव डेस्क : भारत और अमेरिका के कई नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों ने भारत के उच्चतम न्यायालय से सोमवार को अपील की कि वह पूर्व पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट की जमानत मंजूर करे। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) और ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ की ओर से आयोजित एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि हत्या के एक मामले में भट्ट की दोषसिद्धि ना केवल गलत है, बल्कि यह झूठे सबूतों पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट 22 जनवरी को भट्ट की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा।
शशि थरूर क्षुब्ध
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शशि थरूर ने कहा कि वह भट्ट के साथ हुए अन्याय से क्षुब्ध हैं। थरूर ने कहा कि समाज के लिए कर्तव्यनिष्ठ होकर सेवा करने और ‘ताकतवर’ से सच बोलने की क्षमता के कारण जेल भेज दिया गया। थरूर ने कहा, ‘संजीव का मामला उस खराब दौर को दर्शाता है, जिसमें हम रह रहे हैं। यह वह दौर जहां सभी भारतीयों को संविधान द्वारा प्रदत्त संवैधानिक मूल्य एवं मौलिक अधिकार कई मामलों में कमजोर होते और कई बार ऐसी ताकतों द्वारा छीने जाते भी प्रतीत होते हैं जो उदार नहीं हैं।
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मोदी सरकार के आलोचकों के साथ हो रहा ऐसा
शास्त्रीय नृत्यांगना साराभाई ने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल भट्ट के मामले में उनके खिलाफ निश्चित एजेंडा चलाया जा रहा, बल्कि मोदी सरकार के अधिकतर आलोचकों के साथ ऐसा हो रहा। IAMC के कार्यकारी निदेशक रशीद अहमद ने कहा,’भारत सरकार को संजीव भट्ट के मामले का राजनीतिकरण करना बंद कर देना चाहिए। स्वयं राजनीतिक बन चुके न्यायाधीशों के बजाय स्वतंत्र न्यायाधीशों की निगरानी में कानून को अपना काम करने देना चाहिए।’
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