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यहां शाम सात बजे से रात 10 बजे तक पक्षियों की खैर नहीं, जानें क्‍यों

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  • असम के दिमा हासो जिले के जतिंगा गांव में सुसाइड कर लेते हैं पक्षी

कोहराम लाइव डेस्क : दुनिया में रहस्‍यों और हैरतों की कमी नहीं। इसके पीछे के चंद कारण समझ में आते हैं, तो कुछ वजहें अनबुझ पहली सी होती। जो समझ में न आए, उस पर मगजमारी का कोई मतलब नहीं, बस हैरत के भाव से भरे रहने की स्‍वतंत्रता है। इस घरती पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं, जो विचित्र तो होती ही हैं, वहां होने वाली घटनाएं भी अनोखी और अनबुझ होती हैं। हम जानते हैं कि कई कारणों से आदमी खुदकुशी का रास्‍ता चुन लेता है, पर यदि किसी जगह खास परिस्थिति में पक्षी खुदकुशी करने लगें, तो आश्‍चर्य कैसे नहीं होगा। जह हां, हम बात कर रहे हैं  दक्षिणी असम के दिमा हासो जिला की, जहां पहाड़ी घाटी में एक जतिंगा नाम का रहस्यमय गांव है। यहां शाम सात बजे से रात 10 बजे के बीच पक्षियों की खैर नहीं। यदि आ जाएं, तो खुदकुशी यानी सुसाइड के लिए हो जाते हैं मजबूर। यह गांव कुदरती कारणों से नौ महीने तक बाहरी दुनिया से अलग-थलग रहता है।

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रोशनी में शुरू हो जाता है सुसाइड का दौर

गांव में आसमान में धुंध होने पर, हवा की रफ्तार तेज होने पर अथवा कहीं से कोई रोशनी कर दे तो पक्षियों के झुंड कीट-पतंगों की तरह बदहवास होकर रोशनी के स्रोत पर मंडरा कर गिरने लगते हैं और मर जाते हैं। सुसाइड की इस दौड़ में स्थानीय और प्रवासी चिड़ियों की 40 प्रजातियां शामिल रहती हैं।

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उड़ने की क्षमता खो देते हैं पक्षी

कहा जाता है कि  इस गांव में बाहरी अप्रवासी पक्षी जाने के बाद वापस नहीं आते। इस वैली में रात में एंट्री पर प्रतिबंध है। जातिंगा दरअसल असम के बोरैल हिल्स में स्थित है। यहां काफी बरसात होती है। बेहद ऊंचाई पर होने और पहाड़ों से घिरे होने के कारण बादलों और बेहद गहरी धुंध का यहां जमावड़ा रहता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक गहरी घाटी में बसे होने के कारण जातिंगा में तेज बारिश के दौरान जब पक्षी यहां से उड़ने की कोशिश करते हैं, तो वह पूरी तरह से गीले हो चुके होते हैं, ऐसे में प्राकृतिक रूप से उनके उड़ने की क्षमता खत्म हो जाती है।

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बेहद घने और कंटीले जंगल

इस गांव में बांस के बेहद घने और कटीले जंगल हैं। ऐसे में गहरी धुंध और अंधेरी रातों के दौरान पक्षी इनसे टकराकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। जहां तक तय समय की बात है, तो पक्षी शाम के इस समय अपने घरों को लौटने की कोशिश करते हैं। ऐसे में इस वक्त दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं।

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