Chatra : चतरा के लावालौंग में मारे गए जिला परिषद उम्मीदवार विक्रम रजक हत्याकांड का खुलासा कर लिया गया हैं। विक्रम का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने उग्रवादी संगठन TPC के फरमान को नहीं माना था। उन्हें चुनाव लड़ने से मना किया गया था, पर वह नहीं माने। उन्होंने चुनाव लड़ा। वहीं वह उग्रवादियों के जानी-दुश्मन माने जाते थे। अपराधियों और उग्रवादियों के खिलाफ हमेशा अपनी आवाज बुलंद रखा करते थे। जिस कारण वह TPC के निशाने पर थे।
चतरा के एसपी राकेश रंजन ने यह खुलासा करते हुए बताया कि TPC के कमांडर आक्रमण गंझू भास्कर उर्फ वीरप्पन उर्फ भैरो गंझू के इशारे पर विक्रम रजक मारे गए थे। इस कांड को अंजाम देने में संगठन के देवेन्द्र गंझू उर्फ मनिकांत उर्फ चौधरी उर्फ कन्हाई व आदित्य गंझू और बहादुर उरांव सहित कुछ अन्य शामिल थे, जिनमें चार पकड़े गए। बाकी की तलाश जारी है। गिरफ्तार देवेंद्र गंझू के खिलाफ चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ जिले के विभिन्न थानों में 21 संगीन मामले दर्ज हैं। वहीं आदित्य गंझू के नाम लावालौंग थाना में तीन मामले दर्ज हैं। इनकी निशानदेही पर एक उम्दा किस्म की 9 एमएम का एक पिस्टल, 7.65 एमएम का एक पिस्टल, दो देशी कट्टा एवं 165 जिंदा गोलियां, एक मैगजीन, चार मोबाईल व दो आपची बाईक मिले हैं। सुनें क्या बोले चतरा एसपी राकेश रंजन
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