Ranchi : चारा घोटाला के सबसे बड़े डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ रुपए की अवैध निकासी मामले में कोर्ट ने 40 दोषियों को सजा सुनाई। लालू यादव को कोर्ट ने 5 साल की सजा और 60 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सजा सुनाई गई। लालू यादव RIMS के पेइंग वार्ड से जुड़ें। वहीं इस मामले में जेल में बंद दूसरे आरोपियों के लिए होटवार जेल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई थी। लालू के वकील ने कहा कि वे लोग हााईकोर्ट में बेल की अर्जी दाखिल करेंगे। उम्मीद है कि उन्हें बेल मिल जाएगी। सजा के ऐलान से पहले लालू यादव बेचैन दिखे। उनका बीपी और शुगर लेवल भी बढ़ गया था।
किसे कितनी सजा, कितना भरना होगा जुर्माना
लालू प्रसाद यादव – 5 साल – 60 लाख
रवि सिन्हा – 4 साल – 20 लाख
मो सईद – 5 साल – डेढ़ करोड़
जगमोहन कक्कड़ – 4 साल – एक लाख
मोहिंदर एस बेदी – 4 साल – एक लाख
दयानंद प्रसाद कश्यप – 4 साल – एक करोड़
उमेश दुबे – 4 साल – 4 लाख
बी बी सिन्हा – 4 साल – 1 करोड़
त्रिपुरारी मोहन प्रसाद – 5 साल – 2 करोड़
अजित कुमार वर्मा – 4 साल – 15 लाख
रवि मेहरा – 4 साल – 10 लाख
महेंद्र कुमार कुंदन – 4 साल – 15 लाख
राजेंद्र कुमार हरित – 4 साल – 20 लाख
जे भेंगराज – 4 साल – 2 लाख
जीएस प्रसाद – 4 साल – 11 लाख
राम प्रकाश राम – 3 साल – 2 लाख
जसबंत सहाय – 3 साल – 2 लाख
रविंद्र कुमार सिंह – 4 साल – 5 लाख
प्रभात कुमार सिन्हा – 4 साल – 3 लाख
ललितेश्वर प्रसाद यादव – 4 साल – 2 लाख
कृष्ण बिहारी लाल – 4 साल – 2 लाख
डॉ अजित कुमार – 4 साल – 2 लाख
सीके लाल – 4 साल – डेढ़ लाख
डॉ बिरसा उरांव – 4 साल – 3 लाख
डॉ शिव नंदन प्रसाद – 4 साल – 2 लाख
राधा रमण सहाय – 4 साल – 6 लाख
एन एन सिंह – 4 साल – 2 लाख
सुरेश – 4 साल – ढाई लाख
बालकृष्ण – 4 साल – 1 लाख
सत्यजीत – 4 साल – 15 लाख
डॉ अर्जुन शर्मा – 4 साल – 2 लाख
डॉ मुकेश कुमार श्रीवास्तव – 4 साल – 2 लाख
डॉ बृज नंदन प्रसाद – 3 साल – 2 लाख
आर के राणा – 5 साल – 60 लाख
महेंद्र प्रसाद – 4 साल – 5 लाख
डीपी श्रीवास्तव – 4 साल – 5 लाख
बेक जूलियस – 4 साल – 1 लाख
कृष्ण मोहन प्रसाद – 5 साल – डेढ़ करोड़
डोरंडा ट्रेजरी से ऐसे हुआ घोटाला ?
डोरंडा ट्रेजरी से 139.35 करोड़ रुपए की अवैध निकासी की कहानी काफी दिलचस्प है। सीबीआई की जांच में जो खुलासा हुआ वो काफी चौंकाने वाला था। इस मामले में पशुओं को फर्जी रूप से स्कूटर और बाइक पर ढोने की बात सामने आई। यह पूरा मामला 1990-92 के बीच का है। CBI ने जांच में पाया कि अफसरों और नेताओं ने मिलकर फर्जीवाड़े का अनोखा फॉमूर्ला तैयार किया। 400 सांड़ को हरियाणा और दिल्ली से कथित तौर पर स्कूटर और मोटरसाइकिल पर रांची तक ढोया गया, ताकि बिहार में अच्छी नस्ल की गाय और भैंसें पैदा की जा सकें। पशुपालन विभाग ने 1990-92 के दौरान 2,35, 250 रुपए में 50 सांड़, 14, 04,825 रुपए में 163 सांड़ और 65 बछिया खरीदीं।
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