Ranchi : जब धरती का तापमान बढ़ रहा हो, नदियां सिमट रही हों और मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा हो, तब पर्यावरण संरक्षण सिर्फ एक विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल बन जाता है। इसी सोच के साथ विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर रांची में रंगों, विचारों और रचनात्मकता के माध्यम से पर्यावरण बचाने का संदेश दिया गया। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के तत्वावधान में SIDHA एवं वानिकी के विद्यार्थियों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषयों को बेहद रोचक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान एक बात साफ दिखाई दी कि नई पीढ़ी पर्यावरणीय चुनौतियों को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग और संवेदनशील है। प्रतिभागियों ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत जीवनशैली की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किये।
रंगोली और चित्रों में दिखी प्रकृति की पुकार
कार्यक्रम में आयोजित रंगोली और चित्रकला प्रतियोगिता ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। प्रतिभागियों ने अपने रंगों और कल्पनाओं के जरिये प्रकृति की सुंदरता, बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खतरों को जीवंत रूप में उकेरा। कहीं सूखती नदियां नजर आईं तो कहीं कटते जंगलों की चिंता। कई चित्रों में स्वच्छ और हरित भविष्य का सपना भी दिखाई दिया।
कचरे से बनाई कलाकृतियां, दिया बड़ा संदेश
कार्यक्रम की सबसे आकर्षक प्रतियोगिताओं में से एक रही “कचरे से कलाकृति” (Art from Waste)। इसमें प्रतिभागियों ने बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को सुंदर और उपयोगी कलाकृतियों में बदल दिया। इस प्रतियोगिता ने यह संदेश दिया कि संसाधनों का पुनः उपयोग और अपशिष्ट में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभाई जा सकती है। वहीं, जलवायु विज्ञान, जैव विविधता संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक पर्यावरणीय पहलों से जुड़े प्रश्नों के माध्यम से प्रतिभागियों के ज्ञान की परीक्षा भी ली गई। प्रतियोगिता ने युवाओं को पर्यावरणीय मुद्दों पर गंभीरता से सोचने के लिये भी प्रेरित किया।
वक्ताओं ने युवाओं को बताया बदलाव का वाहक
कार्यक्रम को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई केवल सरकारों या संस्थाओं की नहीं है, बल्कि इसमें हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण दूत बनने का आह्वान करते हुए जिम्मेदार उपभोग, प्लास्टिक के कम इस्तेमाल, अपशिष्ट प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। कार्यक्रम के समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। लेकिन असली उपलब्धि वह संकल्प था जिसे सभी प्रतिभागियों ने मिलकर दोहराया। सभी ने पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण में कमी और जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया।
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