Delhi : क्या आने वाले दिनों में आपकी जेब में रखे 100, 200 या 500 रुपये के नोट कागज के नहीं, बल्कि प्लास्टिक जैसे चमकदार और मजबूत होंगे? पिछले कुछ दिनों से इस तरह की चर्चाओं ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया से लेकर आर्थिक गलियारों तक एक ही सवाल गूंज रहा था, क्या भारत में अब प्लास्टिक करेंसी आने वाली है? इन तमाम अटकलों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में RBI गवर्नर ने कहा कि देश में पॉलिमर बैंक नोट (Polymer Banknotes) लाने के प्रस्ताव पर विचार जरूर किया जा रहा है, लेकिन अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है और केंद्रीय बैंक इसके सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। गवर्नर के मुताबिक, हाल में मीडिया में आई खबरों में कुछ सच्चाई जरूर है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत में प्लास्टिक नोट कब और कैसे शुरू होंगे। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक फिलहाल पॉलिमर नोटों के फायदे और नुकसान दोनों का मूल्यांकन कर रहा है। यानी सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि प्लास्टिक नोट मजबूत हैं या नहीं, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि भारतीय परिस्थितियों में यह व्यवस्था कितनी व्यावहारिक और किफायती साबित होगी।
आखिर क्या होते हैं पॉलिमर नोट?
पॉलिमर नोट सामान्य कागज से नहीं, बल्कि विशेष प्रकार की प्लास्टिक सामग्री से बनाये जाते हैं। ये देखने में अधिक चमकदार होते हैं और इनमें कई आधुनिक सुरक्षा फीचर भी जोड़े जा सकते हैं। दुनिया के कई देशों में ये नोट वर्षों से उपयोग किये जा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इनके फायदे हैं। ज्यादा मजबूत और टिकाऊः कागज के नोट जल्दी फट जाते हैं, गीले होने पर खराब हो जाते हैं और समय के साथ घिस जाते हैं। जबकि पॉलिमर नोट ज्यादा मजबूत होते हैं और लंबे समय तक चलते हैं। सरकार का खर्च घट सकता हैः जब नोट ज्यादा समय तक चलेंगे तो उन्हें बार-बार छापने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे नोट छपाई और वितरण पर होने वाला खर्च कम हो सकता है।
डिजिटल पेमेंट बढ़ा, फिर भी कैश की मांग रिकॉर्ड पर
दिलचस्प बात यह है कि यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब देश में UPI और डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन दूसरी तरफ नकदी की मांग भी लगातार बढ़ रही है। मई 2026 के मध्य तक देश में बाजार में मौजूद कुल नकदी यानी Currency in Circulation लगभग 42.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। इसका मतलब साफ है कि डिजिटल भुगतान के बावजूद भारतीयों का भरोसा नकदी पर अभी भी कायम है। यह कोई नया विचार नहीं है। करीब एक दशक पहले, वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने कुछ शहरों में 10 रुपये के करीब एक अरब पॉलिमर नोटों के परीक्षण की मंजूरी दी थी। हालांकि तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियों के कारण वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
किन देशों में चल रहे हैं प्लास्टिक नोट?
अगर भारत इस दिशा में आगे बढ़ता है तो वह उन देशों की कतार में शामिल हो जायेगा जहां पॉलिमर करेंसी पहले से प्रचलन में है। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम के कुछ हिस्से प्रमुख हैं। इन देशों ने पॉलिमर नोटों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ मानते हुये अपनाया है।
इसे भी पढ़ें : शादी की रस्में और बीच में पहुंच गये जेलर, फिर क्या हुआ… जानें
इसे भी पढ़ें : जागी पर्यावरण चेतना, बच्चों ने जीता दिल…
इसे भी पढ़ें : शादी में जाने की बात पर देवर ने भाभी को उतारा मौ’त के घाट, बेटा भी ल’हूलुहान…
इसे भी पढ़ें : DGP तदाशा मिश्र बोली, क्रिमिनलों और गैंगस्टरों की रीढ़ की हड्डी तोड़ दें…
इसे भी पढ़ें : गढ़वा में जजों ने थामी पर्यावरण बचाने की मुहिम…









