Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा में न्याय की चौखट पर शुक्रवार को धरती को हरा-भरा बनाने का संकल्प भी लिया गया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गढ़वा व्यवहार न्यायालय परिसर में पौधारोपण का अभियान चला, जिसने हर किसी को प्रकृति से जुड़ने का संदेश दिया। सुबह की हल्की धूप के बीच न्यायालय परिसर का माहौल कुछ अलग ही नजर आया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के अध्यक्ष मनोज प्रसाद ने पहला पौधा लगाकर की। मुख्य अतिथि द्वारा पौधारोपण के बाद न्यायालय के वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारियों ने भी परिसर में पौधे लगाये। इस दौरान न्यायपालिका के कई अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभाई। पौधारोपण करने वालों में प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय मनोज चंद्र झा, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम दिनेश कुमार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय प्रभात कुमार शर्मा, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ आशुतोष कुमार पांडे तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह सिविल न्यायाधीश एमडी अब्दुल नसीर प्रमुख रूप से शामिल रहे। कार्यक्रम में व्यवहार न्यायालय के कर्मचारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। परिसर में फलदार और छायादार पौधे लगाये गये, ताकि आने वाले वर्षों में यह स्थान और अधिक हरियाली से भर उठे।
“पौधा लगाना ही नहीं, बचाना भी जरूरी”
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद ने पर्यावरण को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुये महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से गर्मी लगातार बढ़ रही है और मौसम का चक्र बदल रहा है, उसे देखते हुये हर व्यक्ति को अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिये। आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, छांव और सुरक्षित पर्यावरण देने का काम करेगा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधारोपण कार्यक्रम का दूसरा चरण दोपहर 12.30 बजे आयोजित किया गया। इस दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष, सचिव और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ मिलकर न्यायालय परिसर में पौधे लगाये। इस अवसर पर बार और बेंच दोनों ने एक स्वर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और जिलेवासियों से कम से कम एक पौधा लगाने की अपील की। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि सिर्फ पौधे लगाये ही नहीं जायेंगे, बल्कि उनकी देखभाल भी सुनिश्चित की जायेगी। उद्देश्य है कि गढ़वा को अधिक हरित, स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके।
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