Ranchi : राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में युवाओं की नसों में जहर घोलने वाले ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ पुलिस और जांच एजेंसियां अब नई रणनीति के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। इस बार निशाना उन बड़े चेहरों पर है, जो पर्दे के पीछे बैठकर करोड़ों रुपये का काला कारोबार चला रहे हैं। इसके लिये पुलिस ने “मनी ट्रेल” को सबसे बड़ा हथियार बनाया है। सबसे ज्यादा नशे की खेप रांची, जमशेदपुर, धनबाद एवं बोकारों में खपने की खबर है। रांची, खूंटी एवं चतरा में ब्राउन शुगर और अफीम की खेती जोरों पर है। कुछ लोगों की शिकायत है कि ”धीमा जहर” बांटने में एक्टिव कुछ सफेदपोश चेहरा का उठना-बैठना तथाकथित पुलिस अधिकारियों का साथ सीधे है। शहर में रहनेवाले एक सजग युवक का कहना था कि उसने नशे के सौदागरों के बारे में सूचना देने के लिये रांची में जिम्मेदार कुर्सी पर बैठे दो अधिकारयों को फोन किया, पर ये दोनों ने फोन तक रिसीव नहीं किये, ऐसे में आखिर सूचना दें तो कहां दें।
ऑनलाइन चल रहा है नशे का खेल
CID, NCB और जिला पुलिस की जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, नशे के कारोबार में अब नकद लेन-देन कम और ऑनलाइन भुगतान ज्यादा हो रहा है। सूत्रों के अनुसार करीब 90 प्रतिशत मामलों में ड्रग्स की खरीद-बिक्री का पैसा ऑनलाइन माध्यम से एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जा रहा है। यही वजह है कि अब पुलिस की नजर नशे की खेप से ज्यादा उसके पैसों के सफर पर है। अधिकारियों का मानना है कि अगर मनी ट्रेल की गहराई से जांच की जाये तो छोटे तस्करों से लेकर बड़े सरगनाओं तक पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।
उतरी स्पेशल टीम
राज्य में अफीम, ब्राउन शुगर, हीरोइन और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिये पहले से गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को और सक्रिय कर दिया गया है। CID के ADG की अगुवाई में काम कर रही यह विशेष टीम अब ड्रग्स नेटवर्क की आर्थिक नस पकड़ने में जुटी है। टीम में एक दर्जन से अधिक अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो तस्करों के नीचे से लेकर ऊपर तक के पूरे नेटवर्क को खंगाल रहे हैं। हाल ही में DGP तदाशा मिश्र की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में भी मनी ट्रेल जांच को सबसे महत्वपूर्ण रणनीति माना गया। अब राज्यभर में गिरफ्तार नशा तस्करों के बैंक खातों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ड्रग्स बेचकर कमाया गया पैसा किन-किन खातों में पहुंचता है और आखिर उसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुये हैं। अधिकारियों का मानना है कि अक्सर कार्रवाई में छोटे तस्कर पकड़ में आते हैं, लेकिन उनके पीछे बैठे असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने का रास्ता बैंकिंग लेन-देन से ही निकलेगा।
बार-बार नाम आने वालों पर खुलेगा डोजियर
नशे के कारोबार में सक्रिय आदतन तस्करों पर अब विशेष निगरानी रखी जायेगी। सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को निर्देश दिया गया है कि जिन लोगों का नाम बार-बार मादक पदार्थों की तस्करी में सामने आ रहा है, उनके खिलाफ डोजियर तैयार किया जाये। वहीं, जमानत पर बाहर आये तस्करों और उनके बेलरों का भी सत्यापन कराया जायेगा। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कहीं वे फिर से उसी धंधे में सक्रिय तो नहीं हैं।
सूचना देने वालों को मिलेगा इनाम
झारखंड सरकार ने भी नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिये बड़ा कदम उठाया है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य में “कैश रिवॉर्ड पॉलिसी” लागू कर दी है।नई नीति के तहत अफीम, हीरोइन, ब्राउन शुगर और सिंथेटिक ड्रग्स के कारोबार की सटीक सूचना देने वालों को 3 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का इनाम दिया जायेगा।यह इनाम केवल आम नागरिकों को ही नहीं, बल्कि तस्करों को पकड़ने वाले पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को भी मिलेगा।
सूचना देने वाले पर हमला हुआ तो सरकार बनेगी सहारा
सरकार ने मुखबिरों और सूचना देने वालों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। नई नीति के तहत यदि सूचना देने वाले व्यक्ति पर हमला होता है तो उसे आर्थिक सहायता दी जायेगी। यदि हमले में व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके आश्रितों को 20 लाख रुपये, स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल होने पर 3 लाख रुपये और सामान्य चोट लगने पर 50 हजार रुपये की सहायता दी जायेगी।
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