New Delhi : राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी गठबंधन INDIA गठबंधन की बड़ी बैठक कल होने जा रही है। लोकसभा चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों और विभिन्न राज्यों में तेज होते सियासी घटनाक्रमों के बीच बुलाई गई इस बैठक को विपक्षी एकता की नई परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। दोपहर 12 बजे शुरू होने वाली इस अहम बैठक में देश के 23 प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है। माना जा रहा है कि इस मंच से विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ अपने अगले राजनीतिक अभियान की रूपरेखा तय करेगा।
दिल्ली में जुटेंगे दिग्गज, विपक्ष दिखायेगा ताकत
राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को लेकर जबरदस्त हलचल है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि देश के सामने खड़े कई बड़े मुद्दों पर साझा आवाज बुलंद करने के लिये एकजुटता जरूरी है। सूत्रों के अनुसार बैठक में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति, संविधान की रक्षा, बेरोजगारी, महंगाई और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जांच एजेंसियों के कथित इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।
कुछ दल नहीं आयेंगे, लेकिन समर्थन रहेगा बरकरार
गठबंधन के कुछ सहयोगी दल विभिन्न कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो पायेंगे। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया है कि वे गठबंधन की विचारधारा और प्रमुख मुद्दों के साथ मजबूती से खड़े हैं। इन दलों ने संदेश भेजकर वर्तमान सरकार की नीतियों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं और विपक्षी एकता के प्रयासों को समर्थन देने की बात कही है। बैठक में आर्थिक मुद्दों पर भी खास जोर रहने की संभावना है। विपक्ष का आरोप है कि बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है और रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। गठबंधन के नेता यह भी मानते हैं कि देश में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को लेकर चिंता का माहौल है, जिसका असर युवाओं और मध्यम वर्ग पर सबसे अधिक पड़ रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर देशभर में बहस चल रही है। इसी कारण यह मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया गया है। गठबंधन के नेताओं का दावा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिये सभी विपक्षी दलों का एक मंच पर आना समय की जरूरत है। बैठक से पहले जारी साझा संदेश में INDIA जनबंधन ने कहा है कि भारत की तरह ही यह गठबंधन भी विविध विचारों और अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमियों के बावजूद एकजुट है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन लोकतंत्र, संविधान और जनता के हितों के मुद्दे पर सभी दल एक साथ खड़े हैं। संभावना है कि साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये विपक्ष भविष्य के आंदोलनों, जनसंपर्क अभियानों और राजनीतिक कार्यक्रमों की घोषणा कर सकता है।
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