Bokaro : कई दफा 108 एम्बुलेंस को फोन किया गया, कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। तब घर में कोई बड़ा मर्द नहीं था। दादी की तबीयत बिगड़ती जा रही थी। 10 साल के पोता सूरज कुमार से रहा नहीं गया। एक ठेला का जुगाड़ किया। लगभग 74 साल की अपनी दादी मरूरा देवी को उसपर लिटाया। फिर ठेला से ही अपनी दादी को लेकर अस्पताल ले गया। उसके पीछे-पीछे घर की एक महिला और दो बच्चे भी चल रहे थे।
सिस्टम से दुखी है सूरज
10 साल के सूरज का मन बहुत दुखी है। सूरज को तब करारा झटका लगा जब उसकी दादी को अस्पताल में भी किसी डॉक्टर ने नहीं देखा। बिगड़े सिस्टम की कोख से उपजी हालत से दुखी मासूम सूरज का कहना है कि अस्पताल का खाता हमेशा खुला रहना चाहिये। डॉक्टर को इलाज करना चाहिये। वहीं एम्बुलेंस तो जरूर होना चाहिये। सूरज बोकारो के चंदनकियारी बागानटोला का रहनेवाला है।
रांची से कंट्रोल होता है 108 एम्बुलेंस
वहीं इस बारे में पूछे जाने पर चंदनकियारी सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्रीनाथ ने कहा कि बीते एक माह से अस्पताल का 108 एंबुलेंस नहीं है। सड़क हादसे में खराब हो गया। 108 एम्बुलेंस रांची से कंट्रोल होता है। अबतक एंबुलेंस नहीं मिल पाया। बोकारो सिविल सर्जन कार्यालय के एसीएमओ डॉ एचके मिश्रा ने कहा कि आपके माध्यम से जानकारी मिली है ऐसे में पूरे मामले में जानकारी लेकर एम्बुलेंस का इंतजाम किया जायेगा।
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