चाईबासा : चाईबासा के घोर नक्सल प्रभावित इलाका टोकलो के लांजी पहाड़ के पास आईईडी विस्फोट मामले में पुलिस और सुरक्षाबलों को शनिवार को बड़ी सफलता मिली। पुलिस ने घटना में शामिल 10 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। 4 मार्च को लांजी पहाड़ के पास हार्डकोर माओवादी अनल दा उर्फ पतिराम मांझी और महाराज प्रमाणिक दस्ते के सदस्यों के द्वारा आईईडी विस्फोट किया गया था। जिसकी चपेट में आने से झारखंड जगुआर के 3 जवान शहीद हो गए थे।
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गिरफ्तार उग्रवादियों में रामराय हांसदा और नेल्शन कंडीर पर 16 मामले दर्ज हैं। वहीं गिरफ्तार अन्य उग्रवादी घटना को अंजाम देने में टीम का सहयोग करते थे और पुलिस टीम पर नजर रखने का काम करते थे। साथ ही पुलिस की गतिविधियों को संगठन तक पहुंचाने का काम करते थे। गिरफ्तार उग्रवादी लांजी में आईईडी हमला में भी शामिल थे। डीआईजी राजीव रंजन सिंह और एसपी अजय लिंडा ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी।
आईईडी विस्फोट की घटना के बाद डीजीपी नीरज सिन्हा समेत कई अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे थे और उग्रवादियों के खिलाफ अभियान को और तेज करने तथा घटना में शामिल उग्रवादियों को जल्द गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद पुलिस टीम ने उग्रवादियों को दबोचने के लिए रणनीति के तहत काम शुरू किया। इसमें सीआरपीएफ-60 बटालियन और सीआरपीएफ-197 बटालियन के साथ जिला बल के जवानों को लगाया गया। पुलिस ने सबसे पहले रामराई हांसदा को टोकलो थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। रामराई हांदसा से कड़ाई से जब पूछताछ की गई तो उसने सारे राज उगल दिए। उसने बताया कि अनल दा उर्फ पतिराम मांझी तथा महाराज प्रमाणिक के कहने पर वह अपने सहयोगियों के साथ पाइप वाला आईईडी बम को लांजी जाने वाले रास्ते में जाकर लगाया था। उसके दूसरे दिन सुबह से ही पुलिस बल के आने का इंतजार करने लगा। एक सहयोगी पेड़ पर चढ़कर पुलिस की गतिविधि को बता रहा था। वहीं कुछ सदस्य बैट्री लेकर इशारे का इंतजार कर रहे थे। पेड़ पर चढ़े सहयोगी ने जैसे ही सुरक्षाबलों के आने का इशारा किया नीचे मौजूद सहयोगियों ने आईईडी विस्फोट करा दिया। और जंगल का लाभ उठाकर मौके से फरार हो गए। इस विस्फोट में झारखंड जगुआर के तीन जवान शहीद हो गए और दो गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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गिरफ्तार सभी अभियुक्तों ने आईडी विस्फोट तथा उस दौरान पुलिस बल पर नजर रखने, उसकी सूचना देने, मोबाइल मुहैया कराने और अन्य जरूरत के सामानों को सही समय पर पहुंचाकर भाकपा माओवादियों को सहयोग करने की बात को स्वीकार की है।
डीआईजी राजीव रंजन ने बताया यह भाकपा माओवादी की बी टीम है, जो उग्रवादियों का हथियार ढोने, आईईडी बम लगाने, बम विस्फोट करने, पुलिस और सुरक्षा बलों की रेकी करने, उनकी गतिविधियों की सूचना उग्रवादियों तक पहुंचाने आदि में इनका सहयोग करते हैं। ये लोग उग्रवादियों की तरह वर्दी नहीं पहनते। ग्रामीण की तरह रहते हैं, जिस वजह से इन्हें गांव और जंगलों में घूमने में कोई कठिनाई नहीं होती और पुलिस और सुरक्षाबलों के निशाने पर नहीं आ पाते। उन्होंने बताया कि पुलिस और सुरक्षाबलों द्वारा लगातार उग्रवादियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई से उग्रवादी कमजोर हुए हैं। घात लगाकर इस तरह की घटना को अंजाम देने में लगे हैं। साथ ही अपना पैटर्न भी चेंज कर रहे हैं। अमूमन उग्रवादी अपनी वर्दी में रहते हैं। लेकिन बी टीम बिना वर्दी में रहकर उग्रवादियों की तरह संगठन का कार्य करते हैं और पुलिस और सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं। पुलिस के लिए यह काफी चुनौती बन गई है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज होगा। उन्होंने समाज से भटके और हथियार थामे लोगों से पुण: मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।
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अपना किला बचाने के लिए जवानों को बनाया निशाना
हार्डकोर भाकपा माओवादी और केंद्रीय समिति सदस्य पति राम मांझी उर्फ आनंदा एवं हार्डकोर महाराजा प्रमाणिक के दस्ते ने पुलिस और सुरक्षाबलों द्वारा लगातार लांजी पहाड़ पर की जा रही ऑपरेशन को लेकर अपना किला बचाने के लिए पुलिस और सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर विस्फोट किया था, जिसमें तीन पुलिसकर्मी शहीद हुए थे और दो पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
ये हुए गिरफ्तार
रामराई हांसदा, नेल्सन कंडीर, बिल्कन सामड, सीता राम सामड, रौशन बोदरा, सोरटो माहली, सोमनाथ भुमिज, अशोक कुमार महतो, मंगल मुंडा, महादेव मुंडा शामिल है।
छापामारी टीम में ये थे शामिल
एसडीपीओ चक्रधरपुर- सुधीर कुमार, पुलिस निरीक्षक चक्रधरपुर- चंद्रशेखर प्रसाद, थाना प्रभारी चक्रधरपुर- प्रवीण कुमार, थाना प्रभारी सोनुवा- सोहनलाल, थाना प्रभारी टोकलो विल्सन गुडियां, सीआरपीएफ 197 बटालियन एवं सीआरपीएफ-60 बटालियन, जिला पुलिस एवं सशस्त्र बल शामिल थे।










