Ranchi : मानसून की दस्तक के साथ डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। बारिश के मौसम में जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का सबसे बड़ा कारण बनता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते सावधानी बरतकर इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। डेंगू मुख्य रूप से एडीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है। वहीं मलेरिया प्लास्मोडियम परजीवी के कारण होता है और संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो शाम और रात के समय ज्यादा सक्रिय रहता है।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
रांची के जाने-माने और BAU के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ उमा शंकर वर्मा के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित शहरीकरण, जलभराव और कचरा प्रबंधन की समस्यायें मच्छरों के पनपने के प्रमुख कारण हैं। बारिश का पानी कूलर, टायर, गमलों, पानी की टंकियों और निर्माण स्थलों पर जमा होकर मच्छरों के लिये अनुकूल वातावरण तैयार करता है। उन्होंने कहा कि एडीज मच्छर बहुत कम मात्रा में जमा पानी में भी अंडे दे सकता है और उसके लार्वा को विकसित होने में केवल 5 से 7 दिन लगते हैं। इसलिये सप्ताह में कम से कम एक बार घर और आसपास की जगहों की जांच जरूर करें। डॉ वर्मा ने कहा कि घर ये आंगन में कुछ ऐसे स्थान हैं, जहां गौर करना बेहद जरूरी है, जैसे वॉटर कूलर, गमलों की ट्रे, बाल्टी और टब, छत पर जमा पानी, पुराने टायर, पक्षियों के पानी के बर्तन एवं अनुपयोगी डिब्बे और कंटेनर। डॉ वर्मा ने कहा कि पानी की टंकियों, ड्रम और अन्य जल संग्रहण वाले बर्तनों को हमेशा अच्छी तरह ढककर रखें ताकि मच्छर उनमें अंडे न दे सकें।
पहनावे में बरतें सावधानी
मच्छरों से बचाव के लिये पूरी बांह के कपड़े पहनें, लंबी पैंट का उपयोग करें और बाहर निकलते समय मोजे जरूर पहनें। बच्चों और बुजुर्गों के लिये यह सावधानी विशेष रूप से जरूरी है। डॉ वर्मा ने कहा कि मच्छरों से बचने के सबसे प्रभावी उपाय है कि खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगायें, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें, स्वीकृत मच्छर रोधी क्रीम या रिपेलेंट लगायें, घर के अंदर मच्छररोधी उपाय अपनायें। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी मच्छरों के काटने से बचाव को सबसे प्रभावी रोकथाम उपायों में शामिल करता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डॉ उमा शंकर वर्मा ने कहा कि यदि मानसून के दौरान अगर तेज बुखार, सिर में तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, लगातार उल्टी, असामान्य रक्तस्राव एवं ठंड लगना और अत्यधिक पसीना आना जैसे लक्षण दिखायें तो बिना देर किये डॉक्टरी सलाह लें। उनका कहना है कि समय पर जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
बुखार को हल्के में न लें
बरसात के मौसम में होने वाले हर बुखार को सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिये। खासकर उन इलाकों में जहां डेंगू या मलेरिया के मामले सामने आ रहे हों, वहां तुरंत जांच कराना जरूरी है।
खुद से दवा लेने से बचें
डेंगू की आशंका होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवायें लेने से बचना चाहिये। कुछ दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिये लगातार बुखार रहने पर चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
सिर्फ फॉगिंग पर न रहें निर्भर
फॉगिंग से मच्छरों की संख्या कुछ हद तक कम हो सकती है, लेकिन यह उनके प्रजनन स्थलों को खत्म नहीं करती। इसलिये घर और आसपास साफ-सफाई बनाये रखना और पानी जमा नहीं होने देना सबसे जरूरी उपाय है।
दिन में भी काटते हैं डेंगू के मच्छर
कई लोग यह मानते हैं कि मच्छर केवल रात में काटते हैं, जबकि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर मुख्य रूप से सुबह और शाम के समय सक्रिय रहता है। इसलिये दिन के समय भी पूरी सावधानी बरतना जरूरी है। डॉ वर्मा का कहना है कि थोड़ी सी सतर्कता और नियमित सफाई से डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। मानसून के दौरान परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक करना जरूरी है ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।
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