UP : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा गणना कक्ष में हुई चोरी और गबन मामले की SIT रिपोर्ट पहली बार सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, गणना प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर चढ़ावे की रकम में हेराफेरी की गई। SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा है कि 27 अप्रैल से पहले भी चोरी की घटनायें होती रही थीं। उपलब्ध CCTV फुटेज की जांच में करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले पैसे छिपाने जैसी गतिविधियां सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बीते साल 6 फरवरी को गणना प्रक्रिया की निगरानी के लिये SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार की गई थी। इसमें गणना कक्ष में प्रवेश, कर्मचारियों की आवाजाही, कपड़े पहनने के नियम और तलाशी जैसी व्यवस्थायें तय की गई थीं। SIT के मुताबिक, बाद में कुछ निगरानी नियमों को कमजोर कर दिया गया। रिपोर्ट में इसे जांच का विषय बताया गया है कि किन परिस्थितियों में इन बदलावों को मंजूरी दी गई।
अनिल मिश्रा की भूमिका पर उठे सवाल
SIT रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अनिल मिश्रा को चढ़ावा और दान प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी। उनकी जिम्मेदारी थी कि गणना प्रक्रिया की निगरानी और SOP का पालन सुनिश्चित करें। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रभावी पर्यवेक्षण और लगातार निगरानी में कमी सामने आई, जिसके कारण उन्हें जिम्मेदार माना गया है। रिपोर्ट में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका पर भी सवाल उठाये गये हैं। SIT के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, उनके पास मंदिर परिसर की कुछ हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिये कोई औपचारिक लिखित अनुमति नहीं मिली थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उन्होंने अपने रिश्तेदार मनीष यादव की गणना ड्यूटी में सिफारिश की थी, जिससे कथित गड़बड़ी का अवसर मिला। SIT के अनुसार, गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की जिम्मेदारी सुरक्षा व्यवस्था लागू कराने की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमित तलाशी और निगरानी की कमी चोरी की घटनाओं का प्रमुख कारण बनी।
चंपत राय और गोपाल राव का रिपोर्ट में जिक्र नहीं
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय और गोपाल राव का उल्लेख नहीं होने की बात सामने आई है। हालांकि, इसका अर्थ क्या है, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। SIT ने अपनी रिपोर्ट को प्रारंभिक जांच बताया है और कहा है कि विस्तृत जांच अभी जारी है। रिपोर्ट में बैंक स्तर की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाये गये हैं। SIT के अनुसार, गणना कर्मियों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई और बैंक प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद निगरानी प्रभावी नहीं रही। वहीं, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की अवधि को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जहां ऑडिट में 180 दिन तक फुटेज सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी, वहीं व्यवस्था में केवल 45 दिन का बैकअप रखा गया।
आठ लोगों पर FIR की संस्तुति
SIT ने प्रारंभिक जांच के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ FIR की संस्तुति की थी। इसके अलावा गणना कक्ष से जुड़े कुछ अन्य कर्मचारियों और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। SIT ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है। अंतिम जांच में प्रशासनिक जिम्मेदारी, सुरक्षा व्यवस्था की कमियां और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट दी जायेगी। इधर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुये कहा है कि जो भी दोषी पाया जायेगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होगी। ट्रस्ट ने लोगों से अपील की है कि बिना प्रमाण आरोप लगाने के बजाय ठोस साक्ष्य जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराये जायें, ताकि निष्पक्ष कार्रवाई हो सके। ट्रस्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक रामलला को कुल 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ। इसमें से 391 करोड़ रुपये संचालन संबंधी खर्चों में लगाये गये। वहीं निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस दान से प्राप्त राशि का उपयोग मंदिर निर्माण और अन्य पूंजीगत कार्यों में किया गया।
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