नई दिल्ली : रेल यात्रियों की जान से खिलवाड़ का बड़ा खुलासा हुआ है। बिना जांच के ही फर्जी फिटनेस मेंटेनेंस सर्टिफिकेट देकर ट्रेन को 18 हजार किलोमीटर दौड़ाया गया। दुर्घटना के बाद हुई जांच में इस बात का खुलासा हुआ है।
14 जनवरी को पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी में हुए हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई थी और 36 यात्री घायल हुए थे। इस घटना के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव घटना स्थल पर पहुंचे थे और हाइलेवल जांच कमेटी बनाई थी। जांच में पता चला है कि इंजन का समय पर मेंटेनेंस ही नहीं हुआ था। इस इंजन को 4500 KM चलने के बाद पीरियोडिकल एग्जामिनेशन के लिए भेजा जाना था, लेकिन इंजन बिना जांच 18 हजार KM तक चलाया गया। इस हादसे की जांच कर रहे कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) मो. लतीफ खान ने 10 फरवरी को पूर्वोंत्तर सीमांत रेलवे मालीगांव गुवाहाटी के GM को पत्र लिखकर यह जानकारी दी है।
CRS ने जांच रिपोर्ट में खुलासा किया है कि समस्तीपुर रेल डिवीजन में इलेक्ट्रिक इंजन की मेंटेनेंस की सुविधा ही नहीं है, लेकिन फर्जी तरीके से मेंटेनेंस का सर्टिफिकेट जारी किया जाता था। इससे पता चला कि बिना जांच के इंजन को दौड़ा कर लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा था। उन्होंने जांच रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे को इस मामले की जांच करनी चाहिए कि, जहां जांच की व्यवस्था ही नहीं है, वहां से सर्टिफिकेट कैसे जारी होता था। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इंजन की जांच समय पर हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
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