Ranchi (Rajesh Singh/Gaurav Kashyap) : 34 साल की उमर में 39 कांडों को अंजाम देकर पुलिस फाइल में मोस्ट वांटेड बना अवधेश जायसवाल उर्फ चूहा को खूंटी पुलिस और एटीएस ने दबोच लिया। वह PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप का करीबी है। उसकी मुड़ी पर झारखंड पुलिस ने 2 लाख रुपये का इनाम भी रखा था। बीते 17 जनवरी को PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप ने चूहा को बिहार में संगठन को मजबूत करने और लेवी वसूलने की जिम्मेदारी सौंपी थी। वह अपने काम में जुट गया था। चूहा को दबोचने के लिए एटीएस बिहार में लगातार जगह-जगह छापेमारी कर रही थी। बीते 10 फरवरी को खबरीलाल ने खूंटी पुलिस कप्तान आशुतोष शेखर के कान में एक फूंक मारी कि चूहा बिहार से भागकर खूंटी के मुरहू में छुपा हुआ है। उसे पकड़ने के लिए खूंटी पुलिस और एटीएस की एक संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने मुरहू के कई इलाकों में देर रात छापेमारी शुरू की। भोर में साढ़े 4 बजे चूहा को दबोच लिया।
पुलिस के सामने चूहा ने कई राज उगले। पुलिस को दिये अपने बयान में चूहा ने खुलासा किया कि संगठन बिहार में पैसा इन्वेस्ट करने की कोशिश कर रहा था। उसकी निशानदेही पर तोरपा इलाके से पुलिस ने 10 मोबाइल जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल संगठन के लोग करते थे। वहीं एक पिट्ठू बैग, मनोज जायसवाल के नाम का आधार और पैन कार्ड, PLFI का पर्चा और चंदा रसीद, 21 सौ 10 रुपये कैश सहित कई सामान बरामद किये गये। दो एके-47 के साये से घिरे इस चूहे का पूरा नाम है अवधेश कुमार जायसवाल उर्फ चूहा उर्फ सरदार उर्फ बिहारी उर्फ मनोज। यह बिहार के नालंदा जिले के चिकसौरा बाजार का रहने वाला है। इसकी फितरत केवल लोगों को डराना-हड़काना और उनसे बतौर लेवी मोटी रकम वसूलना। चूहा के खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी समेत 39 संगीन मामले झारखंड पुलिस फाइल में दर्ज हैं। वह पूर्व में पटना के बेउर जेल और सिमडेगा जेल जा चुका है। चाईबासा के गुदड़ी और सोनुआ में हुये मुठभेड़ में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। तीन दिन पहले चूहा के बिहार से पकड़े जाने की खबर खूब वायरल हुई थी।
यहां याद दिला दें कि ऐसे कई चूहे ने दो दशक पहले भी राजधानी में दस्तक देने की हिमाकत दिखाई थी। तब पुलिस ने उनकी कमर तोड़कर रख दी थी। डर से कुछ बड़े हार्डकोर उग्रवादी हथियार डालकर नतमस्तक हो गए और जो फन उठाए रखे, उन्हें कुचल दिया गया। संगठन में हाल के दिनों में कुछ ऐसे चेहरों को जोड़ा गया है, जो समाज में भोले-भाले माने जाते हैं या फिर हैं सफेदपोश। इनका काम सिर्फ ऐसे लोगों का नाम और फोन नंबर जुटाना, जिनके पास माल है। नाम, नंबर और पारिवारिक हैसियत जुटाकर यह सूचना सीधे पहुंचती थी चूहा तक और चूहा के जरिए सुप्रीमो दिनेश गोप तक। सुप्रीमो से इशारा मिलते ही शुरू हो जाता था डराने-धमकाने और माल मांगने का सिलसिला। कई बार तो वीडियो कॉल कर रंगदारी की मांग की गई थी। कारोबारियों में चूहा के नाम का खौफ था।
कुछ ऐसे चर्चित रंगदारी के मामले जिसमें उछला था चूहा का नाम
- रांची के बिल्डर अभय सिंह (अब मृत) से मांगी गई 2 करोड़ की रंगदारी, डराने के लिए दफ्तर में फेंका गया था बम
- तुपुदाना में रहने वाले अनीश शर्मा से एक करोड़ रुपये की मांगी गई रंगदारी
- तुपुदाना में ही राइस मिल संचालक प्रवीण कुमार से भी एक करोड़
- अपर बाजार के कारोबारी से 50 लाख मांगे गए
- धुर्वा के टेंट व्यवसायी संदीप कुमार से 50 लाख, डराने के लिए घर में दागी गोली
- अपर बाजार के दवा व्यवसायी विजय सिंघानिया से भी 50 लाख की रंगदारी मांगी गई
- डॉक्टर शंभू प्रसाद से 20 लाख
- कांके के एक जमीन कारोबारी से 30 लाख रुपये मांगी गई रंगदारी
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