Kohramlive : अंकिता भंडारी की हत्या का सच जब उजागर हुआ, तो उत्तराखंड की वादियों में ग़ुस्से की गरज गूंज उठी। गुस्साये लोग सड़क पर उतर आये और इंसाफ मांगा, उन्होंने सीधे सजा मांगी। हत्या के इल्जाम में उम्रकैद की सजा पाने वाले रिजार्ट मालिक पुलकित आर्य उसका PA अंकित गुप्ता और रिजार्ट मैनेजर सौरभ भास्कर को कोटद्वार कोर्ट ले जाया जा रहा था। लेकिन ये रास्ता अदालत का नहीं, जनाक्रोश का हो चला। जब पुलिस जीप चीला शक्ति नहर किनारे पहुंची, तब वहां लगभग 300 लोगों की भीड़ पहले से मौजूद थी। कोई अंकिता को अपनी बहन कह रहा था, कोई उसे अपनी बेटी। “आज यहीं फैसला होगा…” ये नारे, वो आंसू और वो आक्रोश, पुलिस को एक दीवार की तरह तोड़ रहा था। नहर में जीप को फेंकने की कोशिश हुई। पुलिसकर्मियों को धक्का मिला। कुछ महिलाओं ने खुद आगे बढ़कर हत्यारे की ओर हाथ बढ़ाये। मनोहर रावत और श्रद्धानंद सेमवाल इन दो पुलिस अफसरों की बहादुरी ने उन 45 मिनट को अंधे इंसाफ में नहीं, क़ानून के रास्ते पर रखा। पौड़ी गढ़वाल के एक जनप्रतिनिधि द्वारा शेयर की गई जीप की लोकेशन की खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई। भोगपुर, ऋषिकेश, टिहरी, हर जगह से लोग उमड़ पड़े। खुदा का शुक्र है कि कानून जिंदा रहा।
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