Lohardaga : लोहरदगा के बुलबुल जंगल में वो दिन सिर्फ एक मुठभेड़ का नहीं था, बल्कि नक्सली नेता प्रशांत बोस की गिरफ्तारी पर उठी नक्सली तिलमिलाहट की गूंज थी। करीब पांच दर्जन नक्सली हथियारों से लैस, साजिश की आग में झुलसते बगावत कर बैठे थे। प्रशांत बोस की गिरफ्तारी नक्सलियों का जहरभरा ज्वालामुखी बना। कहानी की शुरुआत फरवरी 2022 में हुई, जहां गुप्त सूचना पर सुरक्षाबलों ने बुलबुल वन क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। उसी जंगल की गहराई में, जहां कभी पेड़ों पर पक्षी गाते थे, अब वहां नक्सलियों की बैठकें होती थीं, जिसे रवींद्र गंझू जैसे खूंखार कमांडर नेतृत्व दे रहे थे। 45 से 60 नक्सली, बॉक्साइट की कोख में, बारूद बोने को तैयार थे, उस बैठक में कोई मामूली लोग नहीं थे, बलराम उरांव, मुनेश्वर गंझू, और दर्जनों प्रशिक्षित कैडर, जिनकी नसों में विचारधारा नहीं, बस एक ही जहर बह रहा था, “बदला”। हरकट्टा टोली और बांग्ला पाट में जब CRPF की टुकड़ी आगे बढ़ी, तो अचानक गोलियों की बारिश शुरू हो गई। पर जवान झुके नहीं, टूटे नहीं, उन्होंने सीना ठोंक जवाब दिया। इस बात का खुलासा NIA ने अपनी चार्जशीट में किया है। NIA के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, NIA ने जिन दो आरोपियों रंथू उरांव और नीरज सिंह खेरवार, पर हाल ही में चार्जशीट दाखिल की, उनके साथ अब कुल 25 नामों की वो काली सूची तैयार हो चुकी है।
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