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…और फौजी ने चुनी मौत की पोस्टिंग

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मां रोकती रही, बाप सिसकता रहा… पर यह बोल कर निकल पड़ा जांबाज बेटा… माई अब हम देश के बेटा बानी

रांची (नीरज ठाकुर) :एजी सुनले, कहां गइल मालिक। अरे कोइयो तो उनखा बुला के लाओ। कोई हमरा अवजवा काहे नइ सुनता। बोल, काहे चीख चिल्लाइत बाड़े। कोइयो कहत रहे, हमार बेटवा, अइसन जगह जाइत बा, जहवां से घुमल मुश्किल बा। कोइयो त रोका ओकरा। पहिले त पता करा, उ अपन मरजी से जाइता या फिर ओकरा के भेजल जाइता। शांत रह, पहिले बतवा ता जाने दे।“ यह शब्द हैं एक मां चंद्ररेखा देवी के। बाबूजी रामानुग्रह सिंह तो सबकुछ सच सच जान गये, माइ जानती तो उसका प्राण निकल जाता। तब बाबूजी ने सारी बात छुपा ली उसकी माई से। लेकिन माइ का करेजा नहीं माना और बोली मालिक फोनवा लगा के द हमर बेटा के। अरे बेटवा, कहां जा तारे। अगर तो ड्यूटी बा त तू अपन नौकरी छोड़ के चल आव। घरे में खेती-बारी कर। भगवान के दया से हमनी पास सभे बा। हमरा के नइखे चाही अइसन नौकरी। जवाब में बोला बेटा-माई अब हम तोहार कहां रहली, अब हम देश के बेटा बानी। जेहे दिन हम कसम खइली, ओहे दिन हम देश के नाम हो गईली। रख माई फोन…और फौजी निकल पड़ा “मौत” की पोस्टिंग पर। इस फौजी का नाम है चंदन कुमार। करीब एक साल “मौत की चोटी” पर बिता कर सही सलामत लौट आया धरती पर। यह जांबाज फौजी चाहता तो कर्ज उतारने के लिए कोई शार्टकट रास्ता चुन सकता था। पर उसने ऐसा नहीं किया। उसने अपना ही नहीं, देश की आन, बान, शान को बरकरार रखा। जानते हैं उनके इस कठिन डगर का पूरा सफर।

उधर, घर की बहुरिया यानी फौजी की पत्नी तो सब बातों से अनजान थी। उसे तब एक दिन पता चला, जब व्हाट्सएप पर उसने अपने जांबाज पति की एक तस्वीर देखी। उसका माथा ठनका, यह क्या है। बड़ी बड़ी दाढ़ी, मूंछें, लिबास ऐसा, मानो रूह कंपकपा देने वाली जगह पर वे मौजूद हैं। लगातार कई बार बिना सांस रोके फोन लगाया। हर बार नेटवर्क से बाहर। यह जगह थी, धरती से इक्कीस हजार फुट ऊंची सियाचीन ग्लेशियर। सच्चाई जानी “रिम” तो वह बेचैन हो गयी। उसकी धड़कन बढ़ गयी। फौजी चंदन सिंह अपनी पत्नी रीमा को प्यार से “रिम” बुलाते हैं।

सुनिए जरा, इस जांबाज फौजी की कहानी, उनकी जुबानी। बात बात में ही फौजी चंदन यह बोल गये कि साढ़े तीन लाख रुपये का कर्ज माथा पर हो गया था। चुकाना बहुत जल्द था। कुछ सूझ नहीं रहा था। एक साथी ने बताया कि अगर तुम सियाचिन की पोस्टिंग करवा लेते हो, तो वेतन के अतिरिक्त जो पैसा मिलेगा, उससे आराम से अपना कर्ज उतार लोगे। यह सुनते ही चंदन लग गया अपने मिशन में और कामयाब रहा।

वाकई यह फौजी चंदन के लिए खतरनाक मिशन था, लेकिन उसने यह रास्ता चुन देश और सेना का मान रखा। सैनिक इसी के लिए जाने भी जाते हैं।

विश्व का सबसे ऊंचा रणक्षेत्र सियाचिन को वर्ष 1984 में बेस कैंप बनाया गया था। सियाचिन का युद्धक्षेत्र 20 हजार फीट की ऊंचाई पर है। आम तौर पर राजनेता भी 12 हजार फीट के बेस कैंप लुब्रा घाटी तक ही जाते हैं, जबकि हमारे जवान यहां 16 से 20 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात रहते हैं, जहां का तापमान शून्य से 50 डिग्री नीचे बना रहता है। भारत और पाकिस्तान की लड़ाई में जितने सैनिक नहीं मारे गये, उससे ज्यादा 2500 सैनिक आक्सीजन की कमी और हिमस्खलन से मारे जा चुके हैं। पाकिस्तान के 124 सैनिक और 11 नागरिक ग्यारी बेस कैंप में हिमस्खलन में मारे गये थे।

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