Hazaribagh : हजारीबाग के केबी महिला कॉलेज परिसर में संचालित आदिवासी बालिका छात्रावास की तस्वीर में धीरे-धीरे खुरेंच लगती जा रही है। यहां रहने वाली 200 से अधिक आदिवासी छात्रायें आज भी पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिये परेशान है। हालात ऐसे हैं कि पढ़ाई से ज्यादा समय पानी जुटाने में निकल जाता है। वहीं, सुरक्षा को लेकर भी छात्राओं की चिंता कम नहीं है। छात्रावास में शुद्ध पेयजल की इंतेजाम नहीं है। पीने से लेकर खाना बनाने, कपड़े धोने और शौचालय तक के लिये छात्राओं को दूसरे छात्रावासों या कॉलेज परिसर से पानी लाना पड़ता है। सुबह और शाम चापाकल के पास लंबी कतारें आम दृश्य बन चुकी हैं। परेशानी यह भी है कि चापाकल से निकलने वाला पानी भी लाल और अशुद्ध बताया जा रहा है। छात्राओं का कहना है कि रोज पानी की व्यवस्था करने में काफी समय और मेहनत लग जाती है। कॉलेज की कक्षायें खत्म होने के बाद वे बाल्टी और डिब्बे लेकर पानी भरने निकलती हैं। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर पड़ रहा है।
सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल
पेयजल की समस्या के साथ छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है। छात्राओं के अनुसार छात्रावास के पीछे बनी बाउंड्री वॉल काफी नीची है, जिससे असामाजिक तत्व और मनचले युवक परिसर में घुस आते हैं। इससे छात्राओं में हमेशा असुरक्षा का माहौल बना रहता है। बिजली गुल होने पर वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है। सोलर पैनल लगाने का आश्वासन मिला था, लेकिन वह अब तक कागजों से आगे नहीं बढ़ सका। छात्राओं का कहना है कि जिला प्रशासन और कल्याण विभाग के अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया। आला अधिकारी छात्रावास का निरीक्षण भी कर चुके हैं और समाधान का भरोसा भी दिया गया, लेकिन जमीनी स्थिति अब तक नहीं बदली।
निरीक्षण में खुली अव्यवस्थाओं की परतें
छात्राओं की शिकायत पर जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति के मनोनीत सदस्य रमेश कुमार हेम्ब्रम ने छात्रावास का निरीक्षण किया। उन्होंने मीडिया के सामने माना कि यहां पेयजल, बिजली और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन आदिवासी बालिका छात्रावास जैसी महत्वपूर्ण संस्था आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो छात्राओं के साथ धरना देकर जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जायेगा।![]()

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