Kohramlive : गौ तस्करी और मॉब लिंचिंग के एक बहुचर्चित मामले में 14 गुनहगारों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद महिला न्यायाधीश तबस्सुम खान को सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने लगी है। इस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुये इसे न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है। खबर है कि सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को सुरक्षा उपलब्ध करा दी है। यह कदम उस समय उठाया गया जब सजा सुनाये जाने के बाद उन्हें इंटरनेट मीडिया पर धमकियां मिलने लगी थीं।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट युगलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि इस तरह की घटनायें सीधे तौर पर न्यायिक स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं। न्यायिक अधिकारियों के निडर होकर काम करने में बाधा डालती हैं और पूरे न्यायिक तंत्र के लिये गंभीर खतरा पैदा करती हैं अदालत ने कहा कि न्याय देने वाले अधिकारियों के लिये भय का माहौल बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।युगलपीठ ने नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि धमकी देने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है और ऐसे माहौल को रोकने के लिये क्या कदम उठाये गये हैं।
DGP और गृह विभाग से तीन दिन में हलफनामा
हाईकोर्ट ने प्रदेश के DGP एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव से तीन दिनों के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिये हैं। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुये इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई अब 9 जुलाई को निर्धारित की गई है। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो न्यायिक व्यवस्था की स्वतंत्रता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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