Kohramlive : सुप्रीम कोर्ट का शांत और गरिमामय माहौल आज उस वक्त अचानक बदल गया, जब एक याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान अदालत की कार्यवाही में बाधा डाली, वहीं, मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुये कोर्टरूम में कागज भी उछाल दिये। घटना दिन के करीब 11 बजे की है। जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने सुनवाई चल रही थी। तभी खुद अपना मुकदमा लड़ रहे याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने ऐसा व्यवहार किया कि कुछ पल के लिये अदालत का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
‘मिस्टर न्यायिक सेवक…’ कहकर जज को देने लगा आदेश
सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप ने खुद को स्वतंत्र बताते हुये जजों को “न्यायिक सेवक” कहा और लखनऊ के एक ASP के खिलाफ साइबर अपराध के कथित सिंडिकेट में FIR दर्ज कराने का आदेश देने की मांग की। उसने कहा, “मिस्टर न्यायिक सेवक, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के ASP के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दें।” यह सुनकर जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने हैरानी जताई और पूछा, “आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?”
फिर बिगड़ा मामला, हवा में उड़ने लगे कागज
जज के सवाल के बाद याचिकाकर्ता का गुस्सा और बढ़ गया। उसने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की और बेंच के सामने कागज हवा में उछाल दिये। कुछ देर के लिये अदालत की कार्यवाही प्रभावित हुई। हालात बिगड़ते देख कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और उसे कोर्टरूम से बाहर ले गये। बाद में उसे कुछ समय के लिये कोर्ट परिसर में ही DSP कार्यालय में हिरासत में रखा गया। कोर्ट में हुये इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। हालांकि कोहरामलाइव डॉट कॉम इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता।
सजा नहीं, सहानुभूति दिखाई सुप्रीम कोर्ट ने
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना जितनी असामान्य थी, उसके बाद अदालत का रुख उतना ही संतुलित और मानवीय नजर आया। बेंच ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अवमानना या किसी अन्य दंडात्मक कार्रवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने कहा, “वह बहुत परेशान है। यह सब निराशा की वजह से है। हमारे मन में उसके लिये सिर्फ सहानुभूति है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद विवादित आदेश में हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं मिला। इसी के साथ स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) खारिज कर दी गई।
क्या था पूरा मामला?
प्रबल प्रताप ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उसकी रिट याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले स्पेशल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (कस्टम्स), लखनऊ ने FIR दर्ज कराने की उसकी अर्जी को निजी शिकायत के रूप में माना था। हाई कोर्ट ने कहा था कि उसके पास प्रभावी वैकल्पिक कानूनी उपाय मौजूद है और उसे उचित मंच पर जाना चाहिये। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने की कोई वजह नहीं पाई और याचिका खारिज करते हुये मामले का पटाक्षेप कर दिया।
Date: 10th July 2026, Time: 11am
In the Court of Partial Working Day Bench of Justices KV Viswanathan and Alok Aradhe.
Prabal Pratap from Lucknow in UP appeared as a petitioner-in-person and addressed Milords as “Judicial Servant” and ordered them to lodge an FIR against an… https://t.co/22IjgsWFwJ pic.twitter.com/5K9XIfXre3— NCMIndia Council For Men Affairs (@NCMIndiaa) July 10, 2026
इसे भी पढ़ें : दांत दर्द दूर करने के आसान घरेलू तरीके… जानें
इसे भी पढ़ें : इस पेड़ के पास जाने का मतलब है मौत को न्योता देना…
इसे भी पढ़ें : BSNL ने लॉन्च किया सैटेलाइट फोन, कीमत और खासियत चौंका देगी…
इसे भी पढ़ें : आलिया भट्ट और शर्वरी का छाया जलवा, फैंस बोले, चुरा ली सारी लाइमलाइट…
इसे भी पढ़ें : सदमे में केतन के दादा की भी चली गई जान, दुखी पिता ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र… जानें








