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30 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बटोरने वाले बोले, ‘ये सब ससुराल का गिफ्ट है…’

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UP : आय से अधिक संपत्ति के मामले में घिरे सेवानिवृत्त सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार से विजिलेंस की पूछताछ में कई अहम बातें सामने आई हैं। छापेमारी के दौरान जब उनके घर से मिली संपत्तियों, नकदी और सोना-चांदी के बारे में सवाल किये गये तो उन्होंने इसे ससुराल से मिला उपहार बताया। लेकिन जब जांच अधिकारियों ने बैंक खातों से संपत्ति खरीद से जुड़े लेन-देन का ब्योरा सामने रखा, तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

15 संपत्तियां जांच के दायरे में, बाजार कीमत 30 करोड़ से ज्यादा

विजिलेंस ने अदालत में छापेमारी का पूरा ब्योरा पेश कर दिया है। अब ललित कुमार को विस्तृत पूछताछ के लिये फिर बुलाया जायेगा। जांच एजेंसी उनके और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही है। अब तक की जांच में 15 संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। विजिलेंस के अनुसार, इनकी मौजूदा बाजार कीमत 30 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि इन संपत्तियों की खरीद पर करीब 13 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे।

आय से 35 गुना ज्यादा संपत्ति होने का दावा

जांच एजेंसी का कहना है कि अब तक मिले दस्तावेजों के आधार पर ललित कुमार और उनके परिजनों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियां उनकी ज्ञात आय से करीब 35 गुना अधिक हैं। अन्य संपत्तियों का पता लगाने के लिये कई सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों से भी जानकारी मांगी गई है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नौकरी के दौरान जिन-जिन जिलों में उनकी तैनाती रही, वहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार या अनियमितता की शिकायतें दर्ज हुई थीं या नहीं।

घर से क्या-क्या मिला था?

विजिलेंस की छापेमारी में अलीगंज स्थित आवास से 1.62 करोड़ रुपये नकद, करीब 22 किलो सोना-चांदी के बिस्किट और आभूषण, अचल संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक और पोस्ट ऑफिस निवेश से जुड़े कागजात, दो तिजोरियां, एक रिवॉल्वर और वाहन भी बरामद हुये थे। शुरुआती आकलन में बरामद संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 35 करोड़ रुपये बताया गया है।ललित कुमार मूल रूप से रायबरेली के रहने वाले हैं और परिवहन विभाग में ARTO के पद से सेवानिवृत्त हुये हैं। उनके खिलाफ वर्ष 2020 में परिवहन आयुक्त की शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने जांच शुरू की थी। बाद में 11 जून 2024 को आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज किया गया और विवेचना विजिलेंस को सौंप दी गई। विजिलेंस ने अदालत से सर्च वारंट लेकर उनके लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी की थी, जो कई घंटे तक चली। इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसी अब संपत्तियों की जब्ती की प्रक्रिया और धन के स्रोत की पड़ताल में जुटी है। वहीं, जांच की प्रगति के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई की भी संभावना जताई जा रही है।

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