Garhwa(Nityanand Dubey) : चेक बाउंस के मामलों में वर्षों तक अदालतों के चक्कर काट रहे लोगों के लिये राहत की पहल शुरू हो गई है। 18 जुलाई को गढ़वा में आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) ने तैयारी तेज कर दी है। लक्ष्य साफ है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI एक्ट) के तहत लंबित अधिक से अधिक मामलों का आपसी सहमति से निपटारा। इसी सिलसिले में शुक्रवार को न्याय सदन भवन के सेमिनार हॉल में न्यायिक पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं की बैठक हुई। इसमें विशेष लोक अदालत की रूपरेखा और लंबित मामलों के निस्तारण की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
ज्यादा से ज्यादा मामलों को सूचीबद्ध करने पर जोर
यह बैठक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष मनोज प्रसाद के निर्देश पर आयोजित की गई। इसमें NI एक्ट के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी बिक्रांत रंजन, सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-IV-सह-न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, DLSA की सचिव निभा रंजना लकड़ा, अधिवक्ता और पैनल अधिवक्ता मौजूद रहे। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि चेक बाउंस से जुड़े लंबित मामलों की पहचान कर उन्हें विशेष लोक अदालत में सूचीबद्ध किया जाये, ताकि एक ही दिन में अधिक से अधिक मामलों का समाधान हो सके। DLSA की सचिव निभा रंजना लकड़ा ने कहा कि लोक अदालत ऐसे मामलों के समाधान का सरल, त्वरित और कम खर्चीला माध्यम है। यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद खत्म कर लेते हैं तो न केवल समय और पैसे की बचत होती है, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से भी राहत मिलती है। बैठक में अधिवक्ताओं और न्यायिक पदाधिकारियों से कहा गया कि वे अपने-अपने मामलों के पक्षकारों से संपर्क करें और उन्हें लोक अदालत के जरिए विवाद सुलझाने के लिये प्रेरित करें। DLSA का मानना है कि विशेष लोक अदालत में अधिक मामलों के निस्तारण से अदालतों में लंबित वादों का बोझ भी घटेगा और आम लोगों को अपेक्षाकृत जल्दी न्याय मिल सकेगा। इसी उद्देश्य से सभी संबंधित पक्षों से 18 जुलाई की विशेष लोक अदालत में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है।
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