नई दिल्ली : 3 अप्रैल को मुठभेड़ के बाद नक्सलियों के कब्जे में बंधक रहे सीआरपीएफ के जवान राकेश्वर सिंह मनहास को कल रिहा कर दिया गया। रिहाई की खबर सुनते ही राकेश्वर के परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिजनों ने रिहाई के लिए नक्सलियों को धन्यवाद दिया था।
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मगर नक्सलियों के चंगुल से छूटकर सही सलामत लौटे कोबरा बटालियन के जवान राकेश्वर सिंह मनहास ने बताया कि वे हमले के बाद बेहोश हो गए थे। उन्हें जब होश आया तो वे नक्सलियों के कब्जे में थे। उन्होंने बताया कि नक्सली छह दिन तक उन्हें अलग-अलग गांव में घुमाते रहे। हालांकि, किसी ने उनके साथ बदसलूकी नहीं की।
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राकेश्वर ने बताया कि 12 गांव के लोगों द्वारा की गई जनअदालत के बाद छोड़ने का फैसला किया था। यह जनअदालत तुमलगुड़ा में लगाई गई थी। इसमें एक हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। उन सभी की हामी के बाद उन्हें छोड़ा गया।
जवान राकेश्वर को पद्मश्री धर्मपाल सैनी के नेतृत्व में बनी टीम ने छुड़ाया। तीन अप्रैल को टेकलगुड़ा में हुई मुठभेड़ में नक्सलियों ने राकेश्वर को बंदी बना लिया था और फिर उनकी तस्वीर जारी कर बताया था कि वह सकुशल हैं। नक्सलियों ने जवान को छोड़ने के लिए मध्यस्थता की शर्त रखी थी।
राकेश्वर को छुड़ाने के लिए धर्मपाल सैनी के साथ गोंडवाना समाज के अध्यक्ष तेलम बौरैय्या, रिटायर्ड शिक्षक जयरुद्र करे और बीजापुर के मुरतुंडा की सरपंच सुखमती हक्का ने मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाई।
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