बीजापुर : छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुए नक्सली हमले में देश के 22 वीर जवान शहीद हो गए। वहीं अब भी एक जवान लापता है। जिसकी तलाश में सुरक्षाबल जंगल की खाक छान रहे हैं। इतने बड़े हमले का साजिशकर्ता कौन है और संगठन में उसका क्या स्थान है आईऐ बताते हैं उस दुर्दांत नक्सली के बारे में।
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कद काठी से दुबला-पतला और लंबा। चेहरे से शांत दिखने वाला हिडमा उतना ही निर्दयी और दुर्दांत है। हिडमा बड़े हमले और बेरहमी से हत्या के लिए जाना जाता है। हिडमा अपनी नक्सली गतिविधि और संगठन पर अच्छी पकड़ के कारण सबसे कम उम्र में माओवादियों की टॉप सेंट्रल कमेटी का सदस्य बन गया है। नक्सल कमांडर माड़वी हिडमा को संतोष उर्फ इंदमुल उर्फ पोडियाम भीमा जैसे कई नामों से जाना जाता है। यह अपनी नक्सल गतिविधियों के लिए छत्तीसगढ़ ही नहीं कई और नक्सल प्रभावित राज्यों की पुलिस के लिए मोस्टवांटेड है। पुलिस ने इसपर 25 लाख रुपये का इनाम रखा है।
बताया जा रहा है कि हिडमा सिर्फ दसवीं क्लास तक पढ़ा है, लेकिन पढ़ने-लिखने में उसकी रूचि थी, इस कारण वह फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोल लेता है। बताया जाता है कि हिडमा अपने साथ हमेशा एक नोटबुक लेकर चलता है, जिसमें हर वो चीज नोट को बारीकी से नोट करता है। हिडमा की पहचान को लेकर कहा जाता है कि उसके बाएं हाथ में एक अंगुली नहीं है।

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खूंखार हिडमा का जन्म सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में हुआ था। इस गांव में पहुंचने के लिए आज भी ना तो सड़कें हैं और ना ही कोई अन्य सुविधा। राज्य गठन के दो दशक बाद भी इस गांव में स्कूल तक नहीं है। यह गांव दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों से घिर हुआ है। जिसकी वजह से यह नक्सलियों का गढ माना जाता है। यहां आज भी नक्सलियों की तूती बोलती है। रिपोर्ट के अनुसार नक्सल घटनाओं को अंजाम देने की नीति और रणनीति यहीं बनती और फिर घटना को अंजाम दिया जाता है। माना जा रहा है कि बीजापुर में हुए नक्सली हमले की रणनीति भी यहीं तैयार की गई थी। हिडमा का सूचना तंत्र भी उतना ही मजबूत है। तभी तो खुफिया विभाग की रिपोर्ट के बावजूद इतनी बड़ी चूक हुई और नक्सलियों को घेरने गए सुरक्षाबल खुद घिर गए। हिडमा चार स्तरीय सुरक्षा घेरे में रहता है। कई बार उसकी लोकेशन तक फोर्स पहुंच चुकी है, लेकिन उसकी सुरक्षा में तैनात नक्सली अपनी जान देकर उसे बचाते रहे हैं। जिससे उसतक फोर्स अबतक नहीं पहुंच पाई है।
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