कोहराम लाइव डेस्क : कोरोना महामारी ने जीवन में बहुत कुछ बदल कर रख दिया है। इसके इंफक्शन और प्रभाव पर रोज नयी-नयी बातें रिसर्च में सामने आ रही हैं। इसके अस्तित्व में आए एक साल से ज्यादा का समय हो चुका है। जिन लोगों को पहले से ही कोई बीमारी है या जिनका स्वास्थ्य खराब है, उन्हें कोविड-19 इंफेक्शन को लेकर ज्यादा सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि वे उस हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं, जिनकी इम्युनिटी (Immunity) यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है और जिन्हें कोरोना वायरस इंफेक्शन (Coronavirus Infection) से संक्रमित होने का खतरा अधिक रहता है। इस वर्ग में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हृदय रोग के अलावा पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम(PCOS) को भी शामिल कर लिया गया है। अंत: जिन महलिाओं को यह बीमारी हो, उन्हें कोरोना से अधिक बचकर रहना जरूरी है।
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पीसीओएस और कोविड-19 के बीच लिंक की जांच
यूरोपियन जर्नल ऑफ इंडोक्राइनोलॉजी(European journal of Endocrinology) में हाल ही में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक जिन महिलाओं को PCOS है, उन्हें कोविड-19 से संक्रमित होने का खतरा 51 प्रतिशत अधिक है। इस स्टडी में पीसीओएस और कोविड-19 के बीच लिंक क्या है इसकी जांच की गई है। इस दौरान स्टडी में पीसीओएस से डायग्नोज हुई 21 हजार 292 महिलाओं की 78 हजार 310 महिलाओं के साथ तुलना की गई, जो एक समान उम्र की थीं और जिन्हें पीसीओएस नहीं था। स्टडी के नतीजों से पता चला कि जिन महिलाओं को PCOS था उन्हें कोविड-19 होने का खतरा 51 प्रतिशत अधिक था, उन महिलाओं की तुलना में जो सेम एज की थीं लेकिन उन्हें PCOS नहीं था।
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क्या है पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
PCOS यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम सिर्फ महिलाओं में होने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसका संबंध शरीर के हार्मोन्स और मेटाबॉलिज्म से है। अगर आंकड़ों की बात करें तो दुनियाभर की हर 5 में से 1 महिला को PCOS है और इसका सबसे कॉमन कारण है निष्क्रिय जीवनशैली यानी एक ऐसी लाइफस्टाइल जिसमें एक्सरसाइज करना, खुद को ऐक्टिव रखना ये सारी चीजें शामिल नहीं हैं। इसके प्रमुख लक्षण हैं- अनियमित मासिक धर्म या पीरियड्स बिलकुल न आना। पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक ब्लीडिंग होना। शरीर और चेहरे पर अनचाहे बाल आना। वजन बढ़ना या वजन घटना। प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आना।
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