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सामुदायिक शिक्षा को देंगे बढ़ावा : सीएम हेमंत सोरेन

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कोहराम लाइव डेस्क : ‘कोई बच्चा पीछे ना छूटे’ इसको साथ लिए चल रहे झारखंड सरकार ने शुरू किया सामुदायिक शिक्षा का योजना। सरकारी स्कूल के बच्चों को पढ़ाने के लिए इसकी शुरुआत की जा रही है। इसमें मुखिया हर पंचायत में ‘मेंटर टीचर’ बनाएंगे, जिसमें सेवानिवृत्त शिक्षक या स्नातक किए छह लोगों की टीम होगी। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे।

स्टूडेंट्स के परफॉमेंस पर रहेगा धयान

कोरोना महामारी के कारण 75% स्टूडेंट्स को डिजिटल कंटेंट नही मिल पा रहा है। और स्टूडेंट्स के परफॉमेंस पर ध्या्न देना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में सामुदायिक शिक्षा मददगार रहेगा। इस सामुदायिक अभियान में मुखिया, बच्चों के माता-पिता, सेवानिवृत्त शिक्षक, स्नातक पास लोगों को शामिल किया जाएगा, ताकि पूरे समुदाय में पढ़ने और सीखने के लिए बच्चों को प्रेरित किया जा सके।

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4500 पंचायतों में 27 हजार मेंटर टीचर

स्कूल के शिक्षक जहां बच्चों को अपने स्तर से तो पढ़ाएंगे, वहीं समुदाय के लिए भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसमें सभी 4500 पंचायतों के मुखिया को छह-छह मेंटर टीचर की एक टीम तैयार करनी है। राज्य भर में 27 हजार मेंटर टीचर बनेंगे, जो सामुदायिक स्तर पर बच्चों को पढ़ाएंगे। पहली से पांचवी क्लास के बच्चों के लिए कोई बच्चा पीछे ना छूटे, यह सुनिश्चित करेंगे। बच्चों के लिए पंचायत भवन में टीवी के जरिए पठन-पाठन की सुविधा उपलब्ध कराएंगे। साथ ही, लाउड स्पीकर के माध्यम से भी पढ़ाई सुनिश्चित कराएंगे। हर पंचायतों के मेंटर टीचर संबंधित पंचायत के मदर टीचर और स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का सहयोग करेंगे। मेंटर शिक्षकों को विद्यालय प्रबंध समिति के फंड से काम के आधार पर एक निश्चित राशि का भी भुगतान किया जा सकेगा।

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मैट्रिक-इंटर पास छात्र निभाएंगे बाल शिक्षक की भूमिका

राज्य के गांवों में मैट्रिक-इंटर पास छात्र भी बाल शिक्षक की भूमिका में नजर आएंगे। उन्हें उनकी सहमति के बाद स्वयंसेवक के रूप में बच्चों के साथ टैग किया जाएगा। उन्हें उनके घर से एक किलोमीटर की परिधि में रहने वाले बच्चों को समझाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। ऐसे बाल शिक्षकों को सरकार पुरस्कृत भी करेगी।

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