Kohramlive : AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के दौर में अक्सर यह चर्चा होती है कि भविष्य में कौन-कौन सी नौकरियां खत्म हो जायेंगी। लेकिन इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि तकनीक के विकास ने पहले भी कई पेशों को पूरी तरह गायब कर दिया है। कभी जो नौकरियां समाज और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा थीं, वे आज केवल किताबों और इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गई हैं। समय के साथ लोगों की जीवनशैली बदली, नई तकनीकें आई और कई पारंपरिक पेशों की जरूरत खत्म हो गई। आइये जानते हैं ऐसी कुछ अनोखी नौकरियों के बारे में, जो कभी आम थीं, लेकिन अब लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं।
लैम्पलाइटर: सड़कों को रोशन करने वाले लोग
बिजली आने से पहले शहरों और कस्बों की सड़कों पर गैस या तेल से चलने वाले दीये और लैम्प लगाये जाते थे। इन्हें रोज शाम को जलाने और सुबह बुझाने का काम लैम्पलाइटर करते थे। वे सीढ़ी लेकर गलियों और सड़कों पर निकलते थे और एक-एक करके सभी लैम्प जलाते थे। बिजली और स्वचालित स्ट्रीट लाइट सिस्टम आने के बाद यह पेशा इतिहास बन गया।
पिनसेटर: बॉलिंग गेम के अदृश्य कर्मचारी
आज बॉलिंग एली में मशीनें अपने आप गिरी हुई पिन्स को हटाकर नई पिन्स सजा देती हैं। लेकिन पहले यह काम इंसान करते थे। पिनसेटर या पिनबॉय नाम से जाने जाने वाले कर्मचारी हर थ्रो के बाद पिन्स को दोबारा व्यवस्थित करते थे और गेंद वापस खिलाड़ियों तक पहुंचाते थे। ऑटोमेटिक मशीनों ने उनकी जगह ले ली।
स्विचबोर्ड ऑपरेटर: कॉल जोड़ने वाले विशेषज्ञ
टेलीफोन के शुरुआती दौर में किसी को फोन करने के लिये कॉल सीधे कनेक्ट नहीं होती थी। पहले कॉल एक केंद्रीय एक्सचेंज तक पहुंचती थी, जहां स्विचबोर्ड ऑपरेटर तारों को सही जैक में लगाकर दो लोगों को आपस में जोड़ते थे। आधुनिक टेलीफोन नेटवर्क और डिजिटल तकनीक ने इस काम को पूरी तरह स्वचालित कर दिया।
आइस कटर: झीलों से बर्फ काटने वाले मजदूर
रेफ्रिजरेटर के आविष्कार से पहले गर्मियों में बर्फ की भारी मांग रहती थी। आइस कटर सर्दियों में जमी हुई झीलों और नदियों से बर्फ की बड़ी-बड़ी सिल्ली काटते थे और उन्हें विशेष भंडारण गृहों में जमा किया जाता था। बाद में यही बर्फ लोगों तक पहुंचाई जाती थी। फ्रिज और आधुनिक कोल्ड स्टोरेज तकनीक आने के बाद यह पेशा खत्म हो गया।
नॉक-अपर: अलार्म घड़ी से पहले का ‘मानव अलार्म’
आज मोबाइल फोन और अलार्म घड़ियां लोगों को समय पर जगा देती हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब लोगों को जगाने के लिये विशेष कर्मचारियों की जरूरत पड़ती थी। ब्रिटेन और आयरलैंड में नॉक-अपर नाम के लोग सुबह-सुबह घरों की खिड़कियां या दरवाजे खटखटाकर मजदूरों और कर्मचारियों को जगाने का काम करते थे। अलार्म घड़ियों के लोकप्रिय होते ही यह पेशा समाप्त हो गया।
लीच कलेक्टर: जोंक इकट्ठा करने की नौकरी
पुराने चिकित्सा विज्ञान में जोंकों का उपयोग शरीर से रक्त निकालने के लिये किया जाता था। इसलिये लीच कलेक्टर नामक लोग तालाबों और दलदली इलाकों से जोंक पकड़कर डॉक्टरों और चिकित्सकों को बेचते थे। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के विकास के साथ यह पेशा भी लगभग समाप्त हो गया।
तकनीक बदलती है, रोजगार भी बदलते हैं
इतिहास बताता है कि तकनीकी बदलाव केवल नई नौकरियां पैदा नहीं करते, बल्कि कई पुराने पेशों को भी खत्म कर देते हैं। हालांकि हर बदलाव के साथ नये अवसर भी सामने आते हैं। जिस तरह लैम्पलाइटर, नॉक-अपर और स्विचबोर्ड ऑपरेटर जैसी नौकरियां समय के साथ गायब हुईं, उसी तरह भविष्य में भी रोजगार का स्वरूप बदलता रहेगा। चुनौती यह नहीं है कि कौन सी नौकरी खत्म होगी, बल्कि यह है कि बदलती दुनिया के साथ खुद को कितना तैयार किया जा सकता है।
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