spot_img
spot_img
spot_img

श’वयात्रा में क्यों बोला जाता है ‘राम नाम सत्य है,’ इसके पीछे छुपा रहस्य… जानें

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Kohramlive : किसी गांव की पगडंडी हो, शहर की सड़क हो या फिर श्मशान घाट की ओर बढ़ती अंतिम यात्रा,  जब भी कोई शवयात्रा निकलती है, एक स्वर बार-बार सुनाई देता है, “राम नाम सत्य है, सत्य बोलो गत है।” यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि हिंदू धर्म की गहरी आध्यात्मिक सोच और जीवन दर्शन का प्रतीक माना जाता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब व्यक्ति इस संसार को छोड़ चुका है, तब उसके सामने भगवान राम का नाम क्यों लिया जाता है? आखिर इस उद्घोष का वास्तविक अर्थ क्या है? धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में इसके कई गहरे कारण बताये गये हैं।

‘राम नाम सत्य है’— जीवित लोगों के लिये चेतावनी

हिंदू धर्म में मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत माना गया है। शवयात्रा के दौरान जब लोग “राम नाम सत्य है” का उच्चारण करते हैं, तो यह वास्तव में पीछे चल रहे लोगों को जीवन का सबसे बड़ा सत्य याद दिलाता है। महाभारत के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद में धर्मराज युधिष्ठिर कहते हैं, “प्रतिदिन असंख्य लोग मृत्यु को प्राप्त होते हैं, फिर भी जीवित लोग स्वयं को अमर समझकर मोह-माया और धन-संपत्ति के पीछे भागते रहते हैं। इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है?” यही कारण है कि शवयात्रा में यह उद्घोष लोगों को याद दिलाता है कि जीवन क्षणभंगुर है और अंततः केवल ईश्वर का नाम ही शाश्वत सत्य है।

राम नाम को माना गया आध्यात्मिक सुरक्षा कवच

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के बाद शरीर निष्प्राण हो जाता है। कुछ तांत्रिक और आध्यात्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि ऐसे समय में सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर के नाम का स्मरण महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि राम नाम का निरंतर जाप वातावरण को पवित्र बनाये रखता है और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को आध्यात्मिक संरक्षण प्रदान करता है। इसलिये मुखाग्नि दिये जाने तक भगवान के नाम का स्मरण किया जाता है।

मोह-माया से बाहर निकलने का संदेश

धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि मनुष्य जीवनभर रिश्तों, धन-दौलत, पद और प्रतिष्ठा के मोह में उलझा रहता है। लेकिन मृत्यु का दृश्य यह सच्चाई सामने रख देता है कि संसार की हर वस्तु यहीं छूट जाती है। श्मशान की ओर बढ़ती शवयात्रा और उसमें गूंजता “राम नाम सत्य है” का स्वर लोगों को यह एहसास कराता है कि शरीर नश्वर है और अंततः मिट्टी में मिल जाना है। स्थायी है तो केवल परमात्मा का नाम और कर्मों की विरासत।

आत्मा की शांति से भी जुड़ी है मान्यता

हिंदू धार्मिक परंपराओं में यह भी माना जाता है कि मृत्यु के बाद आत्मा कुछ समय तक अपने परिजनों और परिचित वातावरण से जुड़ी रहती है। ऐसे में भगवान के नाम का स्मरण आत्मा को मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला माना गया है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि राम नाम सुनकर आत्मा सांसारिक बंधनों से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ती है और उसे सद्गति प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

जीवन का सबसे बड़ा पाठ

दरअसल, “राम नाम सत्य है” केवल अंतिम यात्रा का नारा नहीं है। यह जीवन का एक गहरा दर्शन है, जो हर व्यक्ति को यह याद दिलाता है कि जन्म और मृत्यु प्रकृति का अटल नियम हैं।जब श्मशान की ओर बढ़ती भीड़ यह उद्घोष करती है, तब वह केवल एक मृतक को विदाई नहीं दे रही होती, बल्कि जीवित लोगों को जीवन का सबसे बड़ा सच भी बता रही होती है, संसार नश्वर है, लेकिन सत्य, धर्म और ईश्वर का नाम अमर है।

इसे भी पढ़ें : दिल को रखना है जवान, थाली में शामिल करें ये 5 सुपरफूड…

इसे भी पढ़ें : इस बारिश अपने घर को बनाइये ‘स्टाइलिश और मच्छर-फ्री,’ जानें…

इसे भी पढ़ें : चीन-अमेरिका को भारत का बड़ा झटका, 5 साल की एंटी-डंपिंग ड्यूटी…

इसे भी पढ़ें : प्रेमानंद महाराज बोले, सुबह की ये 5 आदतें बदल सकती हैं आपकी किस्मत!

इसे भी पढ़ें : झारखंड के पशु चिकित्सकों को बड़ी सौगात… जानें

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

रांची की उस वारदात में आया नया मोड़, जांच में खुल रहे कई राज…

Ranchi : रांची के तुपुदाना इलाके में महिला का...

चश्माधारी नाग की ऐसी हालत देख हर कोई रह गया हैरान, फिर…

Pakur : पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड में एक...

झट से चमकायें अपना चश्मा, ये आसान तरीका… जानें

Kohramlive : चश्मा आज सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि लाखों...