Kohramlive : भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों को विदेशी कंपनियों की कथित अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिये बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) से आयात होने वाले रबर केमिकल पर अगले पांच वर्षों के लिये एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक यह शुल्क 19 जून 2026 से लागू हो चुका है। सरकार के इस फैसले को भारतीय विनिर्माण क्षेत्र, खासकर रबर और टायर उद्योग से जुड़ी घरेलू कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) की जांच में पाया गया कि चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ की कुछ कंपनियां ‘सल्फिनामाइड्स एक्सीलरेटर’ नामक रबर केमिकल को भारतीय बाजार में बेहद कम कीमत पर बेच रही थीं। व्यापार की भाषा में इसे ‘डंपिंग’ कहा जाता है। इसका सीधा असर भारतीय कंपनियों पर पड़ रहा था, क्योंकि वे इतनी कम कीमत पर उत्पाद बेचने में सक्षम नहीं थीं। इससे घरेलू उद्योग को आर्थिक नुकसान हो रहा था और बाजार में प्रतिस्पर्धा असंतुलित हो रही थी।
75 डॉलर से 1748 डॉलर प्रति टन तक लगेगा शुल्क
सरकार द्वारा लगाये गये एंटी-डंपिंग शुल्क की दर आयात करने वाली कंपनी और देश के आधार पर अलग-अलग तय की गई है। नये नियम के तहत यह शुल्क 75 डॉलर से लेकर 1748 डॉलर प्रति टन तक होगा। इससे विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में अत्यधिक सस्ते दाम पर उत्पाद बेचना मुश्किल हो जायेगा।
टायर उद्योग में होता है बड़ा इस्तेमाल
जिस रबर केमिकल पर शुल्क लगाया गया है, उसका उपयोग मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल टायर और अन्य रबर उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। यह केमिकल रबर को अधिक मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने योग्य बनाने में मदद करता है। इसलिए इसका सीधा संबंध ऑटोमोबाइल उद्योग से भी जुड़ा हुआ है। सरकार ने केवल रबर केमिकल तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। दो अन्य महत्वपूर्ण उत्पादों पर भी सख्त कदम उठाये गये हैं।
PET रेजिन पर ड्यूटी
चीन से आयात होने वाले हाई-क्वालिटी PET रेजिन पर 200.66 डॉलर प्रति टन का एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया है। PET रेजिन का उपयोग प्लास्टिक बोतलों, पैकेजिंग और कई औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। चीन, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया से आने वाले एल्युमीनियम फॉयल पर पहले से लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी को भी बढ़ाकर 15 दिसंबर 2026 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
शेयर बाजार में दिखा असर
सरकार के फैसले का असर शेयर बाजार में भी तुरंत दिखाई दिया। देश की प्रमुख रबर केमिकल निर्माता कंपनी NOCIL Limited के शेयरों में लगभग 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। निवेशकों ने इसे घरेलू उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत माना। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय निर्माताओं को बाजार में प्रतिस्पर्धा का बेहतर अवसर मिलेगा और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा। हालांकि इस फैसले का दूसरा पहलू भी है। विदेशी केमिकल महंगे होने के कारण टायर और रबर उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की लागत में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है। यदि घरेलू उत्पादन से मांग पूरी नहीं हो पाती, तो इसका असर उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि सरकार का मानना है कि लंबे समय में यह कदम भारतीय उद्योग को मजबूत करेगा।
WTO के नियमों के तहत हुई कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप और पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है। एंटी-डंपिंग ड्यूटी का उद्देश्य किसी देश को दंडित करना नहीं, बल्कि घरेलू उद्योगों को अनुचित मूल्य प्रतिस्पर्धा से बचाना और रोजगार के अवसरों की रक्षा करना है।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती देने वाला साबित हो सकता है। इससे भारतीय कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा। सरकार के इस कदम को घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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