Chouparan(Krishna Paswan) : सावन की बारिश थी धरती पर हरियाली मुस्कुरा रही थी, खेतों में धान की क्यारियां सज रही थीं और किसानों की उम्मीदें फिर से अंकुरित होने लगी थीं। पर कौन जानता था कि इस मुस्कुराहट के पीछे आसमान कोई दुखभरी चिट्ठी लिए बैठा है। गुरुवार की दोपहर थी। चौपारण के जगदीशपुर गांव में 16 साल का बंटी भुइंया, अपने खेत में पिता के साथ काम में जुटा था। मासूम आंखों में सपना था, घर के लिए कुछ करने का जज़्बा था। तभी, एक कड़कती हुई बिजली गिरी और सब कुछ बुझा गई। खेत के बीचोंबीच वो नन्हा जीवन वहीं थम गया। पास ही खड़े थे प्रकाश भुइंया, बंटी के जीजा। वो भी इस कहर की चपेट में आए और बुरी तरह झुलस गये। अब जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।
अभी गांव की आंखों से बंटी के लिए आंसू थमे भी नहीं थे कि शुक्रवार को एक और कहर टूटा। उसी गांव की करिश्मा देवी, जिनकी उम्र महज 30 साल थी, खेत में धान रोप रही थीं। अपने परिवार का साथ देने की कोशिश में थीं। लेकिन आसमान ने एक बार फिर अंगार बरसाये। एक और बिजली गिरी… और करिश्मा की सांसें भी हमेशा के लिए थम गईं। दो दिन, दो जानें और एक गांव… शोक में डूबा हुआ।
शनिवार को चौपारण के अंचलाधिकारी संजय यादव और थानेदार अनुपम प्रकाश पीड़ित परिवारों के घर पहुंचे। संवेदनाएं जताईं, कंधा थपथपाया और भरोसा दिलाया कि आपदा राहत कोष से मुआवज़ा जल्द ही मिलेगा। संजय यादव ने आश्वासन दिया कि घायल प्रकाश को हर मुमकिन चिकित्सीय मदद दी जा रही है।
गांव के लोग सहमे हुये हैं। आसमान अब उन्हें डराने लगा है। थानेदार अनुपम प्रकाश ने ग्रामीणों को समझाया कि बारिश और तूफान के समय खुले में काम करना खतरे से खाली नहीं है। प्रशासन ने जागरूकता अभियान भी चलाया। बताया कि वज्रपात से कैसे बचा जा सकता है, क्या करना चाहिए, और क्या नहीं। वहीं, ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें त्वरित आर्थिक सहायता, खाद्यान्न, और आवश्यक संसाधन मिलें। ताकि वे इस त्रासदी से उबर सकें।
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