Ormanjhi(Kuldeep Tiwari/Amitabh Panday) : रांची की तपती दोपहर में जहां इंसान भी पसीने से तरबतर है, वहीं ओरमांझी के बिरसा मुंडा जैविक उद्यान के बाशिंदे — शेर, हाथी, हिरण और नन्हे बंदर भी बेचैनी से आकाश की ओर देख रहे थे, शायद उन्हें बादलों की एक परत का इंतजार था। लेकिन इस बार राहत आसमान से नहीं, धरती के उन हाथों से आई, जिनके सीने में जानवरों के लिये प्यार धड़कता है। वन विभाग और जीव प्रशासन ने मिलकर 1600 से भी ज्यादा जानवरों के लिये गर्मी से जूझने की एक नायाब योजना तैयार की। हर पिंजरे में लगे हैं पंखे और रंगीन टेंट, ताकि ना केवल ठंडक मिले, बल्कि एक उम्मीद भी जागे कि किसी ने हमारा ख्याल रखा है।
मांसाहारी दोस्तों को अब केवल मांस नहीं, बल्कि विटामिन्स और पानी में घुला ग्लूकोज़ भी मिल रहा है — ताकि गर्मी उनके जोश को कम न कर सके। वहीं, शाकाहारी प्राणियों के लिये आम और अन्य मौसमी फलों का मेवा-भोजन परोसा जा रहा है — रसदार, ठंडा और सुकून देने वाला। शेर की दहाड़ में अब गर्मी से चिढ़ नहीं, बल्कि ताजगी की गूंज सुनाई देती है। हाथियों ने पानी से भरे किलों में डुबकी लगाकर अपनी नाराजगी को ठंडक में बदल दिया है। हिरण अब अपने शेड के साये में आराम से बैठे हैं, जैसे किसी पुराने गीत की छांव में लेटे हों। वहीं, इन तमाम कोशिशों के बीच, कुछ दीवारों पर लेप भी किया गया है — एक खास जड़ी-बूटी वाली मिट्टी का लेप — ताकि गर्मी वहां भी हार मान जाये, जहां हवा रुक जाती है। बिरसा जैविक उद्यान के इन बेज़ुबानों ने भले कुछ न कहा हो, लेकिन उनकी आंखों में तैरती नमी ने बता दिया…सुकून है।












