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जब सरकार नहीं जागी, तो गांव जाग उठा, फिर क्या हुआ, जानें…

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Gumla : कहते हैं कि जरूरत इंसान से वह काम भी करवा देती है, जिसकी उसने कभी कल्पना नहीं की होती। झारखंड के गुमला के एक गांव ने इस कहावत को सच साबित कर दिया है। वर्षों तक सड़क की आस में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटाने के बाद जब कहीं से सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने खुद ही अपनी तकदीर की राह बनानी शुरू कर दी। पालकोट प्रखंड की कुल्लूकेरा पंचायत स्थित सिंजाग गांव के सैकड़ों महिला-पुरुष एक साथ सड़क निर्माण के लिये जुटे। श्रमदान के जरिये करीब एक किलोमीटर लंबे रास्ते को दुरुस्त करने का काम शुरू किया गया। यह सड़क सिंजाग, आंबाटोली, ऊपरघाट और डांड़टोली जैसे कई टोले-मुहल्लों की जीवनरेखा है। इसी रास्ते से ग्रामीण पालकोट प्रखंड मुख्यालय, बाजार, अस्पताल और अन्य जरूरी जगहों तक पहुंचते हैं। कुछ ग्रामीण बताते हैं कि बरसात के दिनों में इस सड़क की हालत इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। कई बार लोग फिसलकर घायल हो जाते हैं और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।

बारिश आते ही दुनिया से कट जाता है गांव

गांव की प्रतिभा कच्छप कहती हैं कि खराब सड़क की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती और मरीजों का इलाज, सब कुछ इस रास्ते पर निर्भर है। बरसात शुरू होते ही सड़क कीचड़ में बदल जाती है और गांव लगभग बाहरी दुनिया से कट जाता है। यही मजबूरी अब ग्रामीणों को खुद सड़क बनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

हर घर से 100 रुपये, फिर शुरू हुआ बदलाव

सड़क निर्माण के लिये ग्रामीणों ने किसी सरकारी फंड का इंतजार नहीं किया। गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से हर घर से 100-100 रुपये चंदा जुटाया और निर्माण कार्य शुरू कर दिया। गांव के लोगों ने तय किया कि अब और इंतजार नहीं किया जायेगा। सभी ने मिलकर आर्थिक सहयोग किया और श्रमदान के जरिये सड़क को सुगम बनाने का बीड़ा उठाया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय विधायक के समक्ष गुहार लगाई गई। विधायक ने गांव का दौरा कर सड़क निर्माण का आश्वासन भी दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई काम शुरू नहीं हो सका। वहीं, हकीकत में आज भी सड़क कीचड़ और गड्ढों से भरी हुई है।

 

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