RANCHI : झारखंड की जानी-मानी लेखिका रश्मि शर्मा ने अपनी नई पुस्तक ‘झारखंड से लद्दाख’ का लोकार्पण किया। यह लोकार्पण रांची के स्टेशन रोड स्थित प्रभात प्रकाशन के कार्यालय में किया गया। रश्मि शर्मा ने पहले भी कई पुस्तकें लिखी हैं, जिसके लिए उन्हें 2020 में साहित्य रत्न सम्मान और 2021 में शैलप्रिया स्मृति सम्मान प्राप्त हो चुका है। इस पुस्तक में झारखंड और लद्दाख दोनों ही प्रदेशों के यात्रा वृत्तान्त शामिल हैं, जो इन प्रदेशों की कई अनदेखी अनजानी सच्चाइयों को सामने लाती हैं।
रश्मि शर्मा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा
‘झारखंड से लद्दाख’ पुस्तक लोकार्पण के दौरान रश्मि शर्मा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, इस किताब में झारखंड से लद्दाख की यात्रा को बड़ी खूबसूरती के साथ बताया गया है। पुस्तक में झारखंड और लद्दाख दोनों ही प्रदेशों के यात्रा वृत्तान्त हैं, जो इन प्रदेशों की कई अनदेखी अनजानी सच्चाइयों को सामने लाते हैं। लोकार्पण समारोह में लेखिका रश्मि शर्मा ने अपनी किताब पर बात करते हुए कहा कि ‘जब घर की एकरसता से ऊब जाती हूं, तो बाहर की ओर भागती हूं। वह बाहर अपने शहर का कोई कोना हो सकता है, थोड़ी दूर में कोई झरना या किसी जंगल का निपट एकांत। इस बाहर की यात्रा से मेरे अंदर का अवसाद खंडित होता है और मेरी दृष्टि अधिक स्पष्ट हो जाती है। मेरी आंखें वो सब देखने लगती हैं, जो सामान्य तौर पर कोई गौर नहीं करता’।

वरिष्ठ कथाकार व उपन्यासकार राकेश कुमार सिंह ने कहा
यह किताब संस्मरण और सफरनामे का कोलाज है। यह संकलन यात्रियों तथा संस्करण के बीच आवाजाही का एक दस्तावेज है और यात्राओं के द्वारा जो सूचना लेखिका अपने ढंग से अपने पाठकों को परोसती है, वह अपने आप में एक नायाब कथ्य सी लगती है। नेतरहाट, खूंटी, मैक्लुस्कीगंज एवं झारखंड के अन्य अनेकानेक क्षेत्रों का सिलसिलेवार और वृहद वर्णन लेखिका के भीतर के हृदय की संवेदना एवं उसकी उत्कंठा को भी दर्शाता है। झारखंड वाले खंड में तो लेखिका की भाषा एक जादू जगाती है।
दूरदर्शन के पूर्व निदेशक प्रमोद कुमार झा ने कहा
इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में प्रकाशित कृति पर बात करते हुए दूरदर्शन के पूर्व निदेशक प्रमोद कुमार झा ने कहा यह पुस्तक दरअसल एक शब्दचित्र है, जिसमें विविध विषयों के चलचित्र हमारे समक्ष उपस्थित होते हैं और उन्हें किसी सूचनाओं से भी हमें बड़े रोमांच के साथ ओतप्रोत करते हैं। जिस प्रकार एक शास्त्रीय गायक एक ही पंक्ति को अपने नानाविध सुरों से आबद्ध कर उनका वर्णन करता है उसी प्रकार रश्मि शर्मा की शब्दावली भी नानाविध तरीकों से हमें तरह-तरह स्थलों के बहुविध प्रकार से परिचित कराते हैं।
प्रसिद्ध कथाकर पंकज मित्र ने कहा
इस किताब में एक लेखिका की फोटोग्राफिक डिस्क्रिपशंस दृष्टि का पता चलता है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार यात्राएं एक मनुष्य को और बेहतर बनाती हैं और यात्राओं से लेखक की दृष्टि थी बहुत गहरी होते चली जाती हैं और उसमें सैकड़ों आयामों जुड़ते चले जाते हैं। तरह-तरह के लोगों से मिलकर आदमी और भी ज्यादा निखरता है। उसके दोस्ती और व्यापक होती है और इस प्रकार एक लेखक के द्वारा कहा जाने वाला परिदृश्य सभी के दिलों में एक नई दृष्टि प्रवाहित करता है।
कहानीकार अनिता रश्मि ने कहा
अपूर्व सौंदर्य के धनी झारखण्ड के ग्रामीण परिवेश का गहनतापूर्ण तथा सरस वर्णन इस पुस्तक को विशेष बनाता है, जिससे लेखिका की न केवल सुरुचिपूर्ण दृष्टि, अपितु उनकी गहन बौद्धिक दृष्टि का भी संकेत देता है, साथ ही लेह लद्दाख की विभिन्न स्थलों का सुरुचिपूर्ण वर्णन को पढ़ना अपने आप में एक रोमांचक यात्रा से कम नहीं है।
पर्यावरणविद् नीतीश प्रियदर्शी ने कहा
रश्मि शर्मा के इस वृतांत को पढ़ते हुए हम अतीत के दिनों में खो जाते हैं। रश्मि की किताब के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार झारखंड अनेकानेक रोमांच एवं रहस्यों से भरा पड़ा है और इसका रश्मि शर्मा ने इस जीवंतता के साथ वर्णन किया है कि झारखंड के अनेकानेक क्षेत्र किसी चलचित्र की भांति हमारी आंखों के सम्मुख खड़े होते हैं. इस भाँति अनेकानेक स्थलों का सूक्ष्मतम वर्णन इस पुस्तक को एक दस्तावेज बनाते हैं।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में कुमार बृजेंद्र, प्रकाश देवकुलिश, संगीता कुजारा टॉक, रीता गुप्ता,नंदा पांडेय, सारिका भूषण, राजीव थेपड़ा, चंद्रिका प्रसाद ठाकुर, सूरज श्रीवास्तव अनामिका प्रिया, सारिका भूषण, सुनीता अग्रवाल, सत्य प्रकाश पाठक, सोनल थेपड़ा, प्रवीण परिमल, कविता सिंह, रीता गुप्ता, नरेश बंका, संतोष मृदुला, आशुतोष, वैभव मणि त्रिपाठी, मयंक मुरारी, रेनू त्रिवेदी मिश्रा, संध्या चौधरी, पत्रकार संजय कृष्ण, सियाराम झा सरस, प्रशांत गौरव, नीरज नीर, राकेश रमन, दीप्ति भगत, रेणु मिश्रा, डेजी सिन्हा, जयमाला, कामेश्वर कुमार सिंह, पंकज पुष्कर, चंद्रिका ठाकुर, मनोज कुमार नेगी आदि उपस्थित थे। आयोजन की शुरुआत वीना श्रीवास्तव के स्वागत संबोधन से हुई। धन्यवाद ज्ञापन प्रभात प्रकाशन के राजेश शर्मा ने दिया। कार्यक्रम का खूबसूरत संचालन मुक्ति शाहदेव ने किया।
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