रांची : राह के हर ‘कांटे’ को निकाल फेंक देने में मशहूर होते जा रहे न्यूक्लियस मॉल के मालिक विष्णु अग्रवाल पर अब भी मेहरबान हैं शासन-प्रशासन के तथाकथित कुछ कानून के पहरेदार। मुसीबत चाहे जैसी आई हो, मददगारों की फौज खड़ी हो जाती है। ये वैसे मददगार हैं, जिन्हें बस उस पल का इंतजार रहता है कि कब विष्णु भैया घिरें, लोहा गर्म हो…। उल्टा-पुल्टा, हेराफेरी, गोलमाल और फर्जीवाड़ा जैसे शब्दों को लेकर चलने में नाम शुमार हो गया विष्णु अग्रवाल का। गलत को सही का ‘सिग्नेचर’ करा लेने का दमखम है उनमें। मतलब बिकाऊ सिस्टम के सबसे बड़े खरीदार। सत्ता के गलियारे में हनक और गुमान ऐसा कि कुछ भी उनके लिए असंभव नहीं। यही वजह है कि बिना डकार लिये निगल गये नामकुम अंचल के मौजा पुगरू की 9.30 एकड़ जमीन। उनके न्यूक्लियस मॉल को खड़ा करने में भी कुछ गिने-चुने शूरवीरों की गाथा भी चौंकाने वाली है। इन शूरवीरों की लिस्ट में एक पूर्व वीसी की भूमिका भी यादगार है।
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युवा और जांबाज सीएम हेमंत सोरेन ने जांच का आदेश देकर यह जता दिया कि वे किसी के दबाव और प्रभाव में आकर रुकने वाले नहीं हैं। उनके निर्देश पर गठित एसआईटी जांच दल के दायरे में कई सरकारी मुलाजिम भी हैं। रांची के डीसी ने विष्णु अग्रवाल के नाम जमीन की रजिस्ट्री निरस्त करने का आदेश निकाल सबको चौंका दिया है। चारों तरफ हाय तौबा मची है। अब तो विवादित जमीन के तीन दावेदार और सामने आ गये हैं। उपलब्ध दस्तावेज यह दर्शाता है कि कैसे खासमहल की जमीन को रैयती बता कर हवाले कर दिया गया न्यूक्लियस मॉल के मालिक के नाम। देखिए, एक और दावेदार पूरी जीवन कुंडली लेकर आया सामने और क्या बोल गया…
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