Kohramlive : कभी दुनिया की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था की ओर से लगाया गया टैरिफ दुनिया भर के कारोबारियों के लिये सिरदर्द बन गया था। हर कुछ दिनों में नये शुल्क, नई घोषणाएं और नई अनिश्चितताएं। भारत से लेकर यूरोप और एशिया तक के निर्यातक परेशान थे। जिस टैरिफ को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सबसे आक्रामक व्यापारिक नीति माना जा रहा था, उसी टैरिफ से वसूली गई अरबों डॉलर की रकम अब वापस की जा रही है। इस फैसले से भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को भी हजारों करोड़ रुपये की राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
अमेरिका लौटायेगा 166 अरब डॉलर
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका करीब 166 अरब डॉलर की राशि वापस करने की प्रक्रिया में जुट गया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुमान के मुताबिक, इस रिफंड पूल में भारतीय निर्यातकों और कंपनियों का हिस्सा 10 से 12 अरब डॉलर तक हो सकता है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 94,649 करोड़ रुपये या उससे भी अधिक बैठती है। ऐसे में भारत के लिये यह सिर्फ कानूनी जीत नहीं, बल्कि व्यापारिक राहत का भी बड़ा अवसर माना जा रहा है।
आखिर क्यों लौटाना पड़ रहा है पैसा?
इस पूरी कहानी की शुरुआत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले से हुई। फरवरी 2026 में अदालत ने कहा कि ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गये कुछ टैरिफ कानूनी दायरे से बाहर थे। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि प्रभावित आयातकों और कारोबारियों को वसूली गई राशि लौटाई जाये। यही वह फैसला था जिसने ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति को बड़ा झटका दिया और रिफंड का रास्ता खोल दिया।
ट्रंप को उम्मीद थी 700 अरब डॉलर की कमाई
जब 2025 में ये टैरिफ लागू किये गये थे, तब अनुमान लगाया गया था कि इससे 600 से 700 अरब डॉलर तक का राजस्व मिलेगा। लेकिन वास्तविकता कुछ और निकली।सरकारी आंकड़ों के अनुसार टैरिफ से कुल 318 अरब डॉलर की ही वसूली हो सकी। इसमें से करीब 166 अरब डॉलर अब रिफंड के दायरे में आ चुके हैं। यानी जिस नीति को राजस्व बढ़ाने का हथियार बताया गया था, उसका बड़ा हिस्सा अब वापस करना पड़ रहा है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच अमेरिका भेजे गये भारतीय निर्यात पर 10 अरब डॉलर से ज्यादा का संभावित रिफंड बनता है। हालांकि अंतिम राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने दावे स्वीकार होते हैं और कितने आयातक पात्र पाये जाते हैं।अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा एजेंसी (CBP) के अनुसार, अब तक करीब 20 अरब डॉलर का रिफंड जारी किया जा चुका है। कुल मिलाकर लगभग 85 अरब डॉलर की राशि आयातकों और शिपिंग कंपनियों को वापस मिलने की उम्मीद है। अभी भी करीब 65 अरब डॉलर का भुगतान बाकी है।
रिफंड लेने के लिये क्या करना होगा?
रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाने के लिये CBP ने ‘कंसोलिडेटेड एडमिनिस्ट्रेशन एंड प्रोसेसिंग ऑफ एंट्रीज’ (CAPE) नामक व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत आयातक या उनके कस्टम ब्रोकर एक साथ कई एंट्री के लिये रिफंड आवेदन कर सकते हैं। पहला चरण 20 अप्रैल से शुरू हो चुका है। इसमें उन मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनका कस्टम निपटान अभी पूरा नहीं हुआ है या जिनकी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। रिफंड के लिये सबसे पहले CBP के ‘ऑटोमेटेड कमर्शियल एनवायरनमेंट’ (ACE) पोर्टल पर खाता बनाना होगा। इसके बाद CAPE डिक्लेरेशन के जरिये आवेदन किया जायेगा। यदि दस्तावेज सही पाये जाते हैं और अतिरिक्त जांच की जरूरत नहीं पड़ती, तो आमतौर पर 60 से 90 दिनों के भीतर रिफंड जारी किया जा सकता है।
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