Kohramlive : जिंदगी कब, कहां और किस मोड़ पर किसी को उसकी मंजिल से मिला दे, यह कोई नहीं जानता। कभी-कभी किस्मत ऐसी कहानी लिख देती है, जिसे सुनकर लगता है मानो किसी फिल्म का खूबसूरत दृश्य आंखों के सामने जीवंत हो उठा हो। फिल्म लगान में आमिर खान की मां का किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाली अभिनेत्री सुहासिनी मुले की प्रेम कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यह कहानी उस उम्र में शुरू हुई, जब ज्यादातर लोग जीवन की जिम्मेदारियों से मुक्त होकर सुकून की तलाश करते हैं। लेकिन सुहासिनी ने 60 वर्ष की उम्र में जिंदगी का नया अध्याय शुरू किया और साबित कर दिया कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती।
जब फेसबुक ने मिलाया दो दिलों को
करीब 15 साल पहले सोशल मीडिया का दौर उतना आम नहीं था जितना आज है। एक को-स्टार की सलाह पर सुहासिनी फेसबुक से जुड़ी थीं। उनका मकसद काम से जुड़े लोगों से संपर्क बनाना था, लेकिन किस्मत ने उनके लिये कुछ और ही सोच रखा था। एक दिन फेसबुक पर स्क्रॉल करते हुये उनकी नजर ‘पीपुल यू मे नो’ में दिखी एक प्रोफाइल पर पड़ी। यह प्रोफाइल थी भौतिक वैज्ञानिक डॉ. अतुल गुर्टू की। सुहासिनी को विज्ञान में हमेशा से दिलचस्पी रही थी। उन्होंने उत्सुकतावश एक संदेश भेज दिया। उस समय अतुल स्विट्जरलैंड में एक वैज्ञानिक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। एक साधारण-सा सवाल बातचीत का कारण बना और फिर संदेशों का सिलसिला शुरू हो गया।
बातों-बातों में दिल तक पहुंच गई दोस्ती
दिन बीतते गये। फेसबुक चैट ईमेल में बदली और ईमेल धीरे-धीरे भावनाओं का पुल बन गये। दोनों एक-दूसरे को समझने लगे। इसी दौरान अतुल ने इशारों-इशारों में बताया कि वे जीवनसाथी की तलाश में हैं। सुहासिनी उस बात को याद करते हुये हंसते हुये कहती हैं कि उन्होंने मन ही मन सोचा था, “जब 60 साल में सही इंसान नहीं मिला, तो अब अचानक कहां से मिल जायेगा?” जब सुहासिनी ने अपनी एक दोस्त को अतुल के बारे में बताया तो दोस्त ने बड़ी सधी हुई सलाह दी। उसने कहा, “इस उम्र में विकल्प वैसे भी कम होते हैं। दरवाजा खुलने से पहले ही बंद मत करो। बात आगे बढ़ाओ। अगर पसंद न आये तो पीछे हट जाना।” हालांकि सुहासिनी बेहद सतर्क थीं। इंटरनेट की दुनिया पर आंख बंद करके भरोसा करना उन्हें मंजूर नहीं था।
पहले की पूरी जांच-पड़ताल, फिर बढ़ाया रिश्ता
जब अतुल ने उनका फोन नंबर मांगा तो सुहासिनी ने साफ जवाब दिया, “अच्छी लड़कियां अजनबियों को अपना नंबर नहीं देतीं।” उन्होंने अपनी तसल्ली के लिये अतुल के बारे में पूरी जानकारी जुटाई। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की वेबसाइट पर मौजूद उनकी तस्वीरों और प्रोफाइल की जांच की। सबकुछ सही निकला। तब जाकर उनके मन का संदेह दूर हुआ।
पहली मुलाकात और फिर 75 दिनों में शादी
जुलाई में बातचीत शुरू हुई थी। दिवाली के अगले दिन दोनों पहली बार आमने-सामने मिले। यह मुलाकात घंटों चली। बातों का सिलसिला ऐसा चला कि दोनों को एहसास हो गया कि वे एक-दूसरे के साथ सहज और खुश हैं। फिर उन्होंने ज्यादा इंतजार नहीं किया। महज 75 दिनों के भीतर, 16 जनवरी 2011 को दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली और जिंदगी की नई यात्रा शुरू कर दी।
मां ने कहा- तुमने बुद्धिमान इंसान चुना है
शादी के बाद जब अतुल, सुहासिनी की मां से मिले तो वे बेहद खुश हुईं। उन्होंने बेटी से मुस्कुराते हुये कहा कि “तुमने एक बुद्धिमान इंसान चुना है।” शायद यही वह आशीर्वाद था जिसने इस रिश्ते को और मजबूत बना दिया।
15 साल बाद भी बरकरार है वही अपनापन
मीडिया समूह के बड़े घराने ”अमर उजाला” में छपी एक खबर के अनुसार, आज सुहासिनी 75 वर्ष की हो चुकी हैं। उनकी शादी को भी 15 साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन उनके चेहरे की मुस्कान बताती है कि जिंदगी का यह फैसला कितना खूबसूरत साबित हुआ।उनकी कहानी यह संदेश देती है कि प्यार उम्र का मोहताज नहीं होता। कभी-कभी जिंदगी की सबसे खूबसूरत शुरुआत वहीं से होती है, जहां लोग सोचते हैं कि अब सब कुछ खत्म हो चुका है। शायद इसी का नाम जिंदगी है, जहां एक फेसबुक रिक्वेस्ट भी कभी-कभी जीवनभर का साथ बन जाती है।
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