Bokaro (ससुर को बताया आपकी बेटी भाग गयी, राज खुला सड़कों पर…) : अभागी निशा की किस्मत ही फूट गयी। अग्नि को साक्षी मानकर जिसका हाथ थामा था उसने ही उसके भरोसे का खून कर दिया। शादी के करीब 10 साल बीत गए पर निशा का ऐसा कोई दिन नहीं गुजरा जब वह रोई ना हो। उसे याद नहीं कि वह गुजरे 10 साल में खुलकर हंसी हो या फिर पति अमित उसे काही घुमाने-फिराने ले गया हो। वर्ष 2012 में निशा कई जब शादी हुई, तब अमित एक प्राइवेट कंपनी में मामूली सी नौकरी करता था। उसकी जिंदगानी में निशा के कदम पड़ते ही अमित की जिंदगी बदल गयी। उसकी केनरा बैंक में नौकरी लग गयी। कुछ दिनों तक सबकुछ ठीक-ठाक रहा। पर अचानक अमित और परिवार के लोगों का निशा के प्रति बर्ताव बदल गया। इस बीच निशा एक बेटे की मां बन चुकी थी। निशा को सताने और रुलाने का सिलसिला जारी रहा।
हद तो तब हो गयी जब बीते 27 अप्रैल को निशा को बेदम मारा पीटा, उसे अंधेरे बाथरूम में बंद कर दिया गया। जब निशा को होश आया तब खुद को धनबाद के गोविन्दपुर इलाके में पायी। निशा के छोटू महतो को मौके पर बुलाया गया। पिता के आते ही राज खुला कि निशा पर बेइंतिहा जुल्मों सितम ढाया जाता था। निशा अपनी जिंदगी से थक हार और ऊब सा गयी थी। फिर भी सबकुछ सहती रही। जब कभी खुद को मिटाने की बात सोचती तब उसके सामने अपने 7 साल बेटे और 3 साल की बेटी का चेहरा आ जाता था।
वह घुट-घुट कर जीती रही पर कभी अपना दर्द किसी को नहीं बताया। निशा के मायके वालों को यह भान जरूर था कि उनकी बेटी की जिंदगी बहुत खुशहाल नहीं, पर वह भी बहुत लाचार बेबस थे। बेटी को हमेशा एक ही सीख दी, अब तुम्हारा घर सिर्फ वही। गोविन्दपुर की सड़कों पर बेहोशी की हालत में मिली बेटी को देख बाप सबकुछ समझ गया। पहले चोटिल निशा का इलाज धनबाद के सदर अस्पताल में कराया उसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से बेटी को लेकर बोकारो पहुंचे। निशा का ससुराल बोकारो के सेक्टर 9 में है। उसके ससुर अलख निरंजन महतो बोकारो में बीएसएल में काम करते है। एक बार फिर निशा के पिता ने थाने में शिकायत दर्ज करायी है। इससे पहले कई बार महिला थाना से लेकर कई पुलिस अधिकारियों के पास अपना दुखड़ा बता चुके थे। निशा के पिता ने बताया कि 29 अप्रैल को दामाद अमित ने फोन कर उन्हें बताया कि निशा घर से गायब है, वह कहीं चली गयी है, बिना कुछ बताए। इसकी सूचना हरला थाना पुलिस को दे दी गयी है। खुद की जान को खतरे में देख निशा अब ससुराल में रहना नहीं चाहती। उसे अब सिर्फ कानून पर भरोसा है।
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