Bundelkhand (Arti Gupta) : मकान और रहन सहन देख सहसा किसी को यकीन नहीं हो रहा कि कल तक पैसों के लिए रोना रोने वाले करोड़ों में खेलते हैं। गुटखा बेचने वाले जगत गुप्ता और उसका भाई प्रदीप गुप्ता के घर जब स्टेट बैंक से नोट गिनने वाली तीन मशीनें मंगाई गई, तब लोग अवाक रह गए। करीब तीन लोगों को नोटों की गिनती करने में लगभग 18 घंटे लग गए। कुल 6 करोड़ 31 लाख 11 हजार 800 रुपये मिले। ये सारे नोट किचन और बेड के नीचे बॉक्स में छुपा कर रखें गए थे। नोट छुपाने में होशियारी ऐसी दिखाई गई थी कि पहली नजर में कोई नहीं पकड़ सकता था। लेकिन सेंट्रल जीएसटी कानपुर की टीम की नजरों से बचा न सके। अब तक मिले सबूत और साक्ष्य के आधार पर टीम इस नतीजे पर पहुंची है कि गुप्ता बंधु जीएसटी चोर है। 20 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर केवल 10 से 15 हजार रुपये सिर्फ जीएसटी में रिटर्न दिखाते थे।
गुप्ता बंधु के ठिकाने पर हुए रेड ने पान मसाला बेचने वाले पीयूष जैन की यादें ताजा कर दी। जैन के यहां से भी करोड़ों नगद मिले थे। प्रथम दृष्ट्या जो बातें छनकर सामने आई है उसके अनुसार गुप्ता बंधु का रहन सहन बिल्कुल साधारण था। घर भी बड़ा नहीं है। चार कमरे के मकान में दोनों भाई रहते हैं। एक करीबी कृति के अनुसार छापामारी और मिले करोड़ों रुपए की फैली खबर हर किसी को चौंका गया। पड़ोसी के अनुसार गुप्ता बंधु का पहले गल्ला की दुकान थी। दुकान नहीं चली, तब इन लोगों ने गुटखा बनाने का काम शुरू किया। इसके बाद खुद माला-माल हो गए और जीएसटी चोरी कर सरकार को चुना लगते रहे। गुप्ता बंधु की फैक्ट्री उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड के हमीरपुर जिली के सुमेरपुर में है।

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