Kohramlive : बीमारी चाहे छोटी हो या बड़ी, दवा ही वह सहारा है जो शरीर को फिर से स्वस्थ बनाने का काम करती है। लेकिन यही दवा अगर गलत तरीके से ली जाये तो फायदा कम और नुकसान ज्यादा कर सकती है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो दवा खाने में की गई छोटी-सी गलती भविष्य में गंभीर बीमारियों, अंगों को नुकसान और इलाज की मुश्किलों का कारण बन सकती है। आजकल अक्सर देखा जाता है कि लोग डॉक्टर की सलाह के बिना मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेते हैं। थोड़ा आराम मिलते ही दवा बंद कर देते हैं या फिर समय पर दवा नहीं लेते। यही आदतें आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती हैं।
इन गलतियों से बचें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दी-खांसी, बुखार या हल्के संक्रमण में लोग बिना जांच और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा खाना शुरू कर देते हैं। कई बार घर में बची पुरानी दवाओं का भी इस्तेमाल कर लिया जाता है। सबसे खतरनाक गलती होती है एंटीबायोटिक का कोर्स अधूरा छोड़ देना। जैसे ही तबीयत में थोड़ा सुधार होता है, लोग दवा बंद कर देते हैं। इससे संक्रमण पूरी तरह खत्म नहीं होता और दोबारा ज्यादा गंभीर रूप में लौट सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें, एंटीबायोटिक का कोर्स बीच में न छोड़ें, दवा समय पर लें, एक्सपायर्ड दवाओं का इस्तेमाल न करें एवं दूसरों की दवा खुद पर आजमाने की गलती न करें।
किडनी और लीवर को भी हो सकता है नुकसान
दर्द से राहत देने वाली दवाएं अक्सर लोग बार-बार खा लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जरूरत से ज्यादा पेनकिलर लेने से किडनी और लीवर पर बुरा असर पड़ सकता है।लंबे समय तक इन दवाओं का अत्यधिक सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। इसलिये किसी भी दर्द निवारक दवा का लगातार उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिये। डॉक्टरों के मुताबिक एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक उपयोग एक बड़ी वैश्विक समस्या बन चुका है। जब लोग बिना जरूरत एंटीबायोटिक खाते हैं या बीच में छोड़ देते हैं, तो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया उन दवाओं के खिलाफ मजबूत हो जाते हैं। इसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में भविष्य में वही दवायें संक्रमण पर असर करना बंद कर सकती हैं और इलाज मुश्किल हो सकता है।
इन दवाओं में लापरवाही पड़ सकती है भारी
उच्च रक्तचाप (बीपी), मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों की दवायें नियमित रूप से लेना बेहद जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं को मनमर्जी से बंद करने या अनियमित रूप से लेने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। स्ट्रोक की आशंका बढ़ सकती है। बीमारी अचानक गंभीर रूप ले सकती है। कुछ लोग नींद न आने पर बार-बार स्लीपिंग पिल्स लेने लगते हैं। वहीं कुछ कफ सिरप का भी जरूरत से ज्यादा उपयोग करते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी दवायें लंबे समय तक बिना निगरानी के लेने पर आदत या निर्भरता का कारण बन सकती हैं। वहीं, बहुत से लोगों को लगता है कि महंगी दवा ही ज्यादा असरदार होती है। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं में सक्रिय तत्व (Active Ingredient) समान होते हैं। दोनों के बीच मुख्य अंतर कंपनी और कीमत का होता है। सही गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवायें भी उतनी ही प्रभावी मानी जाती हैं जितनी ब्रांडेड दवायें।
याद रखें ये सुनहरा नियम
दवा तभी असर करती है जब उसे सही तरीके से लिया जाये। इसलिये डॉक्टर की सलाह का पालन करें, दवा का पूरा कोर्स पूरा करें, समय पर दवा लें, एक्सपायरी डेट जरूर जांचें
खुद से दवा शुरू या बंद न करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि दवा सिर्फ बीमारी को ठीक करने का साधन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। थोड़ी सी समझदारी और सावधानी आपको भविष्य की कई गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों से बचा सकती है।
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