रांची: झारखंड में मॉनसून समय से पहले पहुंच गया, लेकिन बारिश अब तक उस रफ्तार से नहीं हुई जिसकी उम्मीद थी। जून खत्म होने को है और राज्य में वर्षा का बड़ा घाटा दर्ज किया जा चुका है। ऐसे में किसानों से लेकर मौसम वैज्ञानिकों तक की नजर जुलाई पर टिक गई है। मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में मॉनसून बीते 12 जून को पहुंच गया था। इसके बावजूद राज्य में बारिश की रफ्तार कमजोर रही। 1 से 22 जून के बीच झारखंड में सामान्य से करीब 60 फीसदी कम बारिश हुई। इससे पहले 15 जून तक भी वर्षा घाटा 47 फीसदी था।
सबसे ज्यादा चिंता खेतों को लेकर
गढ़वा, पलामू, चतरा, गुमला, लोहरदगा और साहिबगंज समेत कई जिलों में पूरा बारिश नहीं हुई है। यह वही समय है जब धानरोपनी की तैयारी में किसान जुटे रहते हैं। लेकिन कई इलाकों में खेतों को अब भी अच्छी बारिश का इंतजार है। झारखंड की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। ऐसे में यदि जुलाई की शुरुआत भी कमजोर रही तो इसका असर सीधे खरीफ सीजन पर पड़ सकता है।
अब आयेगी राहत या बढ़ेगी चिंता
रांची मौसम केंद्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। जुलाई, अगस्त और सितंबर मॉनसून के सबसे महत्वपूर्ण महीने माने जाते हैं। मौसम वैज्ञानिकों की नजर बंगाल की खाड़ी में बनने वाले लो-प्रेशर सिस्टम पर है। अगर जुलाई में मजबूत सिस्टम बनते हैं तो जून का बड़ा घाटा काफी हद तक पूरा हो सकता है। लेकिन अगर जुलाई भी कमजोर रही, तो जलाशयों, तालाबों और पेयजल व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। भारतीय मौसम विभाग पहले ही देशभर में सामान्य से कम बारिश की संभावना जता चुका है। ऐसे में झारखंड के लिये आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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