UP : रामपुर की संकरी गलियों में आजकल सिर्फ हवा नहीं, फुसफुसाहटें भी घूम रही हैं, “मुत्तलीब फिर पकड़ा गया।” कहते हैं, ये वो लड़का था जो कभी अपने मां-बाप के लिए रोजगार की तलाश में टांडा से निकला था और दुबई में सोने की चमक ने उसकी आंखों को ऐसा चौंधियाया कि अब हर बार उसकी आंतें उसके गुनाह की गवाह होती थीं। वो फ्लाइट, जिसमें बैठने से पहले मुत्तलीब ने एक, दो नहीं, पूरे दस सोने के कैप्सूल गटक लिये थे। सफर के दौरान वो ना खाना खाता, ना हंसता, बस हर मिनट सोचता, “इस बार बच गया तो मम्मी के लिए फ्रिज और बहन की शादी पक्की…” मगर किस्मत ने मुरादाबाद के हाईवे पर उस कार को रोक दिया। जहां बदमाश पुलिस की वर्दी में आये और बोले, “चलो, तलाशी लो।” अपहृत चारों तस्कर सही-सलामत छुड़ा लिये गये। पुलिस ने डॉक्टरों की मदद ली और चारों के पेट से 27 कैप्सूल बाहर निकाले गये। बिरयानी, केले और कोल्ड ड्रिंक, पुलिस ने इन्हें खिलाया ताकि कैप्सूल बाहर आयें।
तीन तो जेल चले गये, मगर मुत्तलीब अब भी जूझ रहा है, दो कैप्सूल अभी भी उसके पेट में हैं। डॉक्टर कह रहे हैं, “जो पेट में बचा है, वही सबूत है… तस्करों ने कबूल किया, “हम सिर्फ प्यादे हैं, असली खिलाड़ी वो हैं, जो हमें हर बार दुबई भेजते हैं, टिकट, होटल, दवाएं, कैप्सूल, सबकुछ वही करवाते हैं।” इन सबके बदले 20 हजार रुपये प्रति चक्कर मिलता है। इस एक ‘चक्कर’ में कई जिंदगियां उलझती हैं, मां की, बीवी की और उस मासूम की, जो अब स्कूल फीस के लिए बाप का इंतजार करता है। अब पुलिस मुत्तलीब के पेट से बचे हुये दो कैप्सूल को बाहर निकालने की कोशिश में जुटी है, वहीं, उन नौ फाइनेंसरों और डॉक्टरों को खोज निकाने में जुटी है, जो इस जाल को चला रहे हैं।
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