Kohramlive Desk : दुधमुंहे बेटे को देखने की तमन्ना उसकी अधूरी रह गई। करीब तीन माह पहले पत्नी ने फोन कर खुशखबरी सुनाई थी। तब से ही सत्येंद्र का मन अपने बेटे को देखने के लिए मचल गया था। वह खुशी का इजहार पूरे गांव में करना चाहता था, इसलिए उसने गांव में भोज करने का मन बनाया। वह जुगाड़ में लग गया, ताकि हैदराबाद से छपरा आना-जाना और भोज-भात सब बढ़िया से हो जाये। अचानक कल रात कबाड़ी दुकान में आग लगी और उसी आग की चपेट में आकर वह मर गया। सत्येंद्र उसी कबाड़ी दुकान में काम करता था। यह कबाड़ी दुकान हैदराबाद के भोईगुड़ा में है। इस आगलगी में कुल 11 लोग काल के गाल में समा गये। मरने वाले ज्यादातर लोग बिहार के हैं।
सत्येंद्र की शादी 4 साल पहले 28 अप्रैल 2018 को मीरा देवी से हुई थी। सत्येंद्र का मूल निवास छपरा के मढ़ौरा प्रखंड के बहुआरा पट्टी गांव में है। उसके पिता का नाम सुकई राम है। सत्येंद्र के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा 2 साल का और छोटा बेटा 3 महीने का है।
इधर, पति सत्येंद्र के नहीं रहने की मनहूस खबर सुन पत्नी मीरा का बुरा हाल हो गया है। रोती बिलखती पत्नी ने कहा कि बेटे होने की खबर सुन वह बेहद खुश थे। खुशी में भोज करने वाले थे। वह अपने दुधमुंहे बेटे को देखने के लिए बेचैन थे। वह हर रोज गांव में भोज-भात की तैयारी की बात किया करते थे। मीरा ने कहा कि वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि भगवान उसे यह दिन दिखायेगा। सत्येंद्र की मौत की फैली खबर के बाद उसके गांव के लोग भी दुखी हैं। वह मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार को पाल पोश रहा था।
इधर, बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिवार को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही है। वहीं तेलंगाना सरकार भी 5-5 लाख रुपए देगी। हादसे में मारे गये लोगों के शवों को बिहार लाने की जिम्मेवारी सरकार ने ली है।
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